नागरिक अभिव्यक्ति | इटावा
शहरी निकाय चुनाव के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में सियासी हलचल तेज होने लगी है। गांवों में पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान और जिला परिषद सदस्य के संभावित दावेदार सक्रिय हो गए हैं। आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद कई दावेदार मतदाताओं के बीच पहुंचकर संपर्क साध रहे हैं। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम की तारीखों का इंतजार बना हुआ है।
गांवों में देर रात तक चौपालों पर चुनावी चर्चा चल रही है। संभावित उम्मीदवारों के प्रभाव, समर्थन और समीकरणों को लेकर आकलन किया जा रहा है। युवाओं में भी चुनाव को लेकर उत्साह दिख रहा है। सोशल मीडिया पर संभावित दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में आने लगे हैं।
परिसीमन से बदले चुनावी समीकरण
इटावा पंचायत समिति क्षेत्र में परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या बढ़ी है। पहले यहां 30 ग्राम पंचायतें थीं, जो अब बढ़कर 42 हो गई हैं। 12 नई ग्राम पंचायतों के गठन से इन क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज हुई हैं। पंचायत समिति के वार्डों की संख्या भी 17 से बढ़कर 23 हो गई है। छह नए वार्ड बनाए गए हैं। जिला परिषद के पांच वार्ड यथावत हैं।
प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
पंचायत समिति प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है। क्षेत्र के वार्ड नंबर 2, 15 और 18 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बताए गए हैं। इनमें खातोली प्रमुख कस्बा होने और अनुसूचित जाति की अच्छी आबादी के चलते दोनों प्रमुख दलों में दावेदारों की हलचल बढ़ गई है। जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इससे संबंधित वार्ड में भी संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ी है।
सरपंच पद के दावेदारों ने लॉटरी के बाद मतदाताओं से मिलना-जुलना शुरू कर दिया है। पंचायत समिति और जिला परिषद के संभावित प्रत्याशी समर्थकों के साथ संपर्क अभियान चला रहे हैं। अब गांवों की सरकार के चुनाव को लेकर सभी की निगाहें तारीखों के ऐलान पर टिकी हैं।
