नागरिक अभिव्यक्ति । इटावा
इटावा में श्री आदर्श रामलीला संस्थान की ओर से आयोजित रामलीला के सातवें दिन भरत मिलाप, सूर्पनखा की नाक छेदन और खर-दूषण वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। धार्मिक प्रसंगों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। आचार्य नवल किशोर शर्मा ने रामायण जी की पूजा-अर्चना कर मंचन का शुभारंभ करवाया।
मंचन में भरत परिवार और सभासदों के साथ चित्रकूट पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने की प्रार्थना की। श्रीराम ने वनवास की अवधि पूरी करने के संकल्प के चलते भरत को अपनी खड़ाऊं सौंप दीं। भरत खड़ाऊं सिर पर रखकर अयोध्या लौट गए। इस प्रसंग के दौरान आचार्य ने ‘राम भक्त चले रे, राम की निशानी’ भजन प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए।
प्रेस प्रवक्ता चेतन बंसल ने बताया कि इसके बाद पंचवटी में सूर्पनखा के श्रीराम के प्रति आकर्षित होने और उनसे विवाह की जिद करने का प्रसंग मंचित किया गया। श्रीराम के लक्ष्मण के पास भेजने के बाद विवाद बढ़ा और लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काट दी। इस दृश्य पर दर्शकों ने तालियां बजाईं। अपमानित सूर्पनखा अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंची। इसके बाद श्रीराम-लक्ष्मण और खर-दूषण के बीच युद्ध हुआ, जिसमें दोनों राक्षस मारे गए।
लीला के समापन पर प्रसंगों से जुड़े तीन प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वाले दर्शकों को संस्थान की ओर से उपहार दिए गए। इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष वेद प्रकाश नागर, उपाध्यक्ष प्रतीक सिंघल, महामंत्री हेमंत नागर, कोषाध्यक्ष रवि जांगिड़ सहित देवेन्द्र सोनी, गिरधारी नागर, मुकेश बंसल, मनीष पंकज, सांवला नागर, प्रमोद कोठारी, भुनेश मीणा, रतन जांगिड़, कृष्णमुरारी नागर, मुरली नागर, बंटी मीणा, आयुष कोठारी, राजेन्द्र प्रजापति, लोकेश शर्मा, जिनेंद्र शर्मा, लकी गर्ग, विजय नागर, हुक्म चन्द नागर, केशव गौतम, पतलु, ओम नागर और महेश नागर (लाला) सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
