नागरिक अभिव्यक्ति । इटावा
इटावा। श्री आदर्श रामलीला संस्थान इटावा की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव के आठवें दिन सीता हरण, जटायु मरण, राम-हनुमान मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य नवल किशोर शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रामायण की पूजा-अर्चना करवाकर किया। संस्था के प्रेस प्रवक्ता चेतन बंसल ने बताया कि लीला की शुरुआत शूर्पणखा के कटे हुए नाक-कान लेकर लंकापति रावण के पास पहुंचने के प्रसंग से हुई। शूर्पणखा ने अपने अपमान की व्यथा सुनाते हुए रावण से बदला लेने की गुहार लगाई। उसने कहा, “मेरी नाक कटी रावण, अब अपनी नाक बचा लो तुम, अब जरा शर्म बची हो तो बहना की लाज बचा लो तुम।” बहन की बात सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसने अपमान का बदला लेने का निश्चय किया।
शूर्पणखा ने रावण को बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण पंचवटी में रह रहे हैं। उनके साथ एक अत्यंत सुंदर स्त्री भी है। इसके बाद रावण ने सीता हरण की योजना बनाई और अपने मामा मारीच को सोने का मृग बनाकर पंचवटी भेजा। आगे की लीला में सीता हरण और माता सीता की रक्षा करते हुए जटायु के बलिदान का मंचन हुआ। इसके बाद श्रीराम की हनुमान से भेंट और सुग्रीव से मित्रता के प्रसंग प्रस्तुत किए गए।
रामलीला के समापन पर दर्शकों से संवाद करते हुए तीन प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को संस्थान की ओर से उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्था अध्यक्ष वेद प्रकाश नागर सहित संस्थान के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
