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गोबर से राखी-दीपक बना रहीं 400 ग्रामीण महिलाएं, घर बैठे रोजगार

चोहमला में ‘सहकार से समृद्धि’ की पहल बनी आत्मनिर्भरता का जरिया, 27 हजार गोमय राखियां तैयार; अब दीपक और गणेश प्रतिमाएं बनाने की तैयारी झालावाड़। चोहमला क्षेत्र की करीब 400 ग्रामीण महिलाएं अब खेती-किसानी के साथ घर बैठे गोमय उत्पाद तैयार कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। देशी गाय के गोबर से राखी, दीपक, बंधनवार और सजावटी सामान तैयार कर महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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गोबर से राखी-दीपक बना रहीं 400 ग्रामीण महिलाएं, घर बैठे रोजगार
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खास बात: इस पहल से महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ देशी गोवंश के संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

एक नजर में पूरी खबर

उपलब्धिजानकारी
जुड़ी महिलाएंकरीब 400
तैयार राखियां27 हजार
राखियां भेजींलखनऊ, नागपुर, दिल्ली सहित कई शहर
प्रशिक्षित उत्पाद51 प्रकार
वर्तमान समूह3-4 महिला समूह
लक्ष्यकरीब 100 महिला समूह

डॉक्टर की पहल से शुरू हुआ रोजगार

सहकार भारती से जुड़ी चोहमला की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेखा वर्मा की पहल और मार्गदर्शन में महिलाओं को गोमय उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद वे अपने घरों पर ही राखी और दीपक तैयार कर रही हैं। इससे उन्हें खेती के अलावा अतिरिक्त घरेलू रोजगार का अवसर मिला है।

27 हजार राखियां, अब शहरों तक पहुंच

महिलाओं ने अब तक करीब 27 हजार गोमय राखियां तैयार की हैं। राखियों को आकर्षक बनाने के लिए इनमें सजावटी स्टोन लगाए जा रहे हैं।

इनकी मांग लखनऊ, नागपुर और दिल्ली सहित कई शहरों से आ रही है। नए ऑर्डर मिलने से महिलाओं में इस काम को लेकर उत्साह बढ़ रहा है।

दीपावली के लिए बन रहे इको-फ्रेंडली दीपक

दीपावली को देखते हुए अब गोबर और मिट्टी से दीपक तैयार किए जा रहे हैं।

दीपक में इस्तेमाल होने वाली सामग्री:

  • देशी गाय का गोबर
  • चिकनी मिट्टी
  • ग्वार गम
  • मैदा
  • लकड़ी का बुरादा

प्रशिक्षण के बाद महिलाएं इन दीपकों का निर्माण घर पर ही कर रही हैं। इसके साथ अब भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

51 तरह के उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग

राष्ट्रीय एसएचजी प्रकोष्ठ समिति की सदस्य एवं मुख्य प्रशिक्षिका अनुराधा श्रीवास्तव और सह संयोजक तुषार श्रीवास्तव के अनुसार महिलाओं को गौधन आधारित 51 प्रकार के स्वदेशी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

गोमय राखी | दीपक | बंधनवार | इंडियन झालर | सजावटी उत्पाद

वर्तमान में 3-4 महिला समूह सक्रिय हैं। भविष्य में करीब 100 समूह बनाने की योजना है।

सिम्पली देशी’ करेगा मार्केटिंग में सहयोग

सहकार भारती के वरिष्ठ पदाधिकारी तुषार श्रीवास्तव ने बताया कि गोमय उत्पादों के विपणन में ‘सिम्पली देशी’ ब्रांड सहयोग करेगा।

इसके साथ ही सोयाबीन, संतरा, गेहूं और मक्का जैसे स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग से भी ग्रामीण महिलाओं को जोड़कर उन्हें उद्यमी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

गोवंश संरक्षण + महिला सशक्तीकरण

डॉ. रेखा वर्मा के अनुसार पहल का उद्देश्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि देशी गोवंश संरक्षण और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को एक साथ आगे बढ़ाना है।

गोबर की नियमित उपलब्धता के लिए कई महिलाएं अब अपने घरों पर गोवंश भी रखने लगी हैं। इससे पशुपालन और स्वरोजगार दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

इस पहल का बड़ा संदेश

स्थानीय संसाधन → महिलाओं को प्रशिक्षण → घर पर उत्पादन → बाजार तक पहुंच → रोजगार और आत्मनिर्भरता

सरकार और सहकारिता क्षेत्र से लगातार सहयोग मिलने पर इस मॉडल को अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जा सकता है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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