झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में दशकों से समाज के हाशिए पर रहे कंजर समुदाय के डेरों में बदलाव की एक नई सुबह आई है। झालावाड़ पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष सामाजिक पुनर्वास अभियान 'नया सवेरा' ने यह साबित कर दिखाया है कि अपराध नियंत्रण केवल दंडात्मक बल से नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण से संभव है। हाल ही में आयोजित एक गरिमामयी पुनर्वास कार्यक्रम में कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) हरेन्द्र कुमार महावर, जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और RTM अध्यक्ष रोहित अरोड़ा की उपस्थिति में 360 भूमिहीन लाभार्थियों को आवासीय पट्टे आवंटित किए गए (283 वितरित एवं 77 प्रक्रियाधीन)। इस कदम ने समुदाय को न केवल उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाया, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी मुख्यधारा की सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया।
पुलिसिंग का बदला स्वरूप: अपराध चक्रव्यूह का अंत
पारंपरिक रूप से कंजर डेरों को अपराध के संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में देखा जाता था, जहाँ संसाधनों और शिक्षा के अभाव के कारण प्रतिवर्ष औसतन 150 से 200 आपराधिक मामले दर्ज होते थे। झालावाड़ पुलिस ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करते हुए डोर-टू-डोर सर्वे और सघन काउंसलिंग शुरू की। पुलिस के इस मानवीय दृष्टिकोण से प्रभावित होकर लगभग 2,000 लोगों ने स्वयं अपराध का रास्ता छोड़ने की शपथ ली। इसका सीधा प्रभाव अपराध के आंकड़ों पर पड़ा—1 अप्रैल से 15 अगस्त के बीच दर्ज होने वाले मामलों की संख्या ऐतिहासिक रूप से घटकर मात्र 09 रह गई।
स्थायी आजीविका और शिक्षा से संवरता भविष्य
पुनर्वास को स्थायी बनाने के लिए झालावाड़ प्रशासन ने आर्थिक और शैक्षणिक मोर्चे पर ठोस रणनीतियां लागू कीं:
कौशल और रोजगार: राजस्थान टेक्स्टाइल मिल (RTM) भवानीमंडी के साथ साझेदारी कर 170 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया और 100 से अधिक परिवारों को स्थायी रोजगार प्रदान किया गया।
सरकारी सेवा में ऐतिहासिक शुरुआत: डेरा बिरियाखेड़ी के युवा मनोज कुमार का चयन राजस्थान होमगार्ड में हुआ, जिससे वे इस समुदाय से शासकीय सेवा में प्रवेश करने वाले पहले प्रतिनिधि बने।
शैक्षणिक क्रांति: चालू सत्र में 165 नए नामांकनों के साथ अब लगभग 900 बच्चे नियमित रूप से विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जो अपराध चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
मानव तस्करी पर वार और सामाजिक गरिमा
अभियान की एक बड़ी सफलता अंतर्राज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करना रही, जिसके तहत 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 नाबालिग बालिकाओं को सकुशल रेस्क्यू किया गया। इसके अतिरिक्त, पहचान पत्र निर्माण, 154 नए बैंक खाते, स्वास्थ्य शिविर, इंटरलॉकिंग रास्ते और पक्के मुक्तिधाम जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित कर समुदाय को सामाजिक गरिमा प्रदान की गई है।
कार्यक्रम में प्रदर्शित डॉक्यूमेंट्री फिल्म और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का सम्मान इस बात का प्रतीक है कि 'नया सवेरा' केवल एक पुलिस अभियान नहीं, बल्कि सामुदायिक पुलिसिंग और सामाजिक न्याय का एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है।
