विवादों और टकराव से बचने के लिए संवाद पर जोर, प्रभावित दुकानदारों और भूमि स्वामियों के पुनर्वास पर मंथन

कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) ने शहर की महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं को गति देने के लिए टकराव के बजाय संवाद और जनसहमति की रणनीति अपनाने की पहल की है। प्राधिकरण के मंथन सभागार में सचिव मुकेश कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में शहर के बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ प्रभावित पक्षकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में शहर के तीन प्रमुख क्षेत्रों—मंदिर श्री मथुराधीश जी कॉरिडोर, रामपुरा-आर्य समाज लिंक रोड और कैथूनीपोल चौराहा—में प्रस्तावित चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं को गति देने के लिए भूमि स्वामियों और व्यावसायिक किरायेदारों से सीधे संवाद शुरू करने पर जोर दिया गया।
पुनर्वास की चिंता, समाधान पर जोर
मथुराधीश जी कॉरिडोर निर्माण के तहत पाटनपोल स्थित नामदेव समाज परिसर के व्यावसायिक किरायेदारों के पुनर्वास का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से उठा। इसी तरह कैथूनीपोल चौराहे पर प्रभावित 13 परिसरों, जिनमें 5 व्यावसायिक किरायेदार शामिल हैं, के पुनर्वास को लेकर भी चर्चा की गई।
व्यापारियों की ओर से उसी क्षेत्र में दोबारा व्यावसायिक पुनर्वास की मांग रखी गई। इस पर तकनीकी अधिकारियों और प्रशासन की ओर से सकारात्मक रुख अपनाते हुए उचित समाधान तलाशने का भरोसा दिलाया गया। प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य विकास कार्यों के साथ स्थानीय व्यापार और आजीविका को भी प्रभावित होने से बचाना है।
रामपुरा-आर्य समाज लिंक रोड पर जाम से राहत की तैयारी
रामपुरा-आर्य समाज लिंक रोड के टी-पॉइंट पर लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या और जाम के समाधान के लिए भी बैठक में चर्चा हुई। कॉर्नर स्थित निजी परिसर मालिकों और दुकानदारों के साथ पारस्परिक सहमति बनाने की दिशा में बातचीत की गई।
प्राधिकरण का प्रयास है कि कानूनी विवाद और जबरन बेदखली जैसी परिस्थितियों से बचते हुए आपसी सहमति के आधार पर सड़क विस्तार की राह आसान की जाए। इससे परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों ने की समीक्षा
बैठक में उपायुक्त शिक्षा पवन, निदेशक अभियांत्रिकी रविंद्र प्रकाश माथुर सहित भूमि अवाप्ति शाखा के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने संबंधित परियोजनाओं में आ रही जमीनी अड़चनों को दूर करने और प्रभावित पक्षकारों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
KDA की यह संवादपरक पहल शहर के विकास कार्यों में जनसहमति, पारदर्शिता और स्थानीय हितों के संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित सहमति और पुनर्वास की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो यह कोटा के शहरी विकास और नियोजन के लिए एक प्रभावी मॉडल बन सकती है।
