कोटा। आलू की विभिन्न किस्मों और उससे तैयार खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी के साथ कृषि विश्वविद्यालय, कोटा में अखिल भारतीय समन्वित आलू अनुसंधान परियोजना की दो दिवसीय 44वीं वार्षिक समूह बैठक का समापन हुआ। देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से आए लगभग 75 वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने आलू अनुसंधान, उत्पादन तकनीक और किसानों तक नई तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण पर मंथन किया।
कृषि विश्वविद्यालय, कोटा एवं केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के संयुक्त तत्वावधान में बैठक कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एवं गुणवत्ता सुधार केंद्र सभागार में आयोजित हुई। अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने की। कार्यक्रम में आलू अनुसंधान परियोजना के वार्षिक प्रतिवेदन तथा विश्वविद्यालय के आलू से संबंधित प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।
डॉ. डूंकवाल ने वैज्ञानिक समुदाय से आलू अनुसंधान की वर्तमान चुनौतियों को पहचानने और उपलब्ध वैज्ञानिक एवं संस्थागत संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वैज्ञानिक, तकनीकी और उत्पादन संबंधी कई चुनौतियां हैं। इनका समाधान किसी एक संस्थान के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए संस्थानों और वैज्ञानिकों को मिलकर काम करना होगा।
बैठक के साथ लगाई गई प्रदर्शनी में आलू की अलग-अलग किस्में और उनसे तैयार खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए गए। आयोजन में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना केंद्रों के साथ पटना, ग्वालियर और मोदीपुरम के क्षेत्रीय केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।
