ADVERTISEMENT
ब्रेकिंग न्यूज़
• हाड़ौती अंचल: कोटा में नए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 120 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत • चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनाव हेतु वोटर लिस्ट अपडेशन की समय सीमा बढ़ाई • राजस्थान बोर्ड परीक्षा 2026 की समय सारिणी घोषित, शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी • टी20 वर्ल्ड कप: भारतीय टीम ने दूसरे मुकाबले में भी दर्ज की धमाकेदार जीत
नागरिक अभिव्यक्ति
होम / ताजा खबर / लेख विस्तार
ताजा खबर

कोटा में सिजेरियन के बाद एक और प्रसूता की मौत, 9 दिन में गई 3 महिलाओं की जान

ब्लड प्रेशर गिरने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल प्रशासन का दावा—कोमा की हालत में लेकर आए थे परिजन

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
अक्षर आकार:
कोटा में सिजेरियन के बाद एक और प्रसूता की मौत, 9 दिन में गई 3 महिलाओं की जान
कोटा में सिजेरियन के बाद एक और प्रसूता की मौत, 9 दिन में गई 3 महिलाओं की जान
ADVERTISEMENT
खबर शेयर करें:

नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा

कोटा। सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूताओं की मौत के मामलों ने एक बार फिर कोटा के चिकित्सा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले नौ दिनों में डिलीवरी के बाद तीन प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया है। ताजा मामले में सिजेरियन के बाद एक और प्रसूता की जान चली गई। बताया जा रहा है कि महिला का ब्लड प्रेशर कम होने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। लगातार सामने आ रही मौतों से अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव के बाद मरीजों को मिलने वाले उपचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजन प्रसूता को कोमा की हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालांकि, महिला की तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों, ब्लड प्रेशर कम होने के कारण और उपचार के दौरान सामने आए घटनाक्रम को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

24 घंटे में दो मौतों के बाद फिर चिंता

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इससे पहले भी अक्टूबर में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए थे। 17 और 18 अक्टूबर की रिपोर्टों में रेशमा और रोशन बैरवा की मौत का जिक्र हुआ था। इन मामलों में अस्पताल प्रशासन ने अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताओं को कारण बताया था, जबकि परिजनों ने उपचार को लेकर सवाल उठाए थे।

इन मौतों के बाद औषधि विभाग ने अस्पताल में इस्तेमाल की जा रही छह दवाओं के उपयोग और आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाकर नमूने जांच के लिए भेजे थे।

अब एक और प्रसूता की मौत के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर प्रसव के बाद महिलाओं की हालत अचानक क्यों बिगड़ रही है। क्या इन घटनाओं के पीछे अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताएं हैं या उपचार व्यवस्था में कोई साझा कमी है? इन सवालों का जवाब जांच और चिकित्सकीय रिपोर्टों से ही सामने आ सकेगा।

लगातार हो रही मौतों के बीच जरूरी है कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों, उपचार के रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों को स्पष्ट किया जाए, ताकि मौत के वास्तविक कारण सामने आएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।

ADVERTISEMENT
लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

comment पाठकों की प्रतिक्रिया (Comments)

अपनी राय दर्ज करें: