नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
कोटा। सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूताओं की मौत के मामलों ने एक बार फिर कोटा के चिकित्सा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले नौ दिनों में डिलीवरी के बाद तीन प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया है। ताजा मामले में सिजेरियन के बाद एक और प्रसूता की जान चली गई। बताया जा रहा है कि महिला का ब्लड प्रेशर कम होने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। लगातार सामने आ रही मौतों से अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव के बाद मरीजों को मिलने वाले उपचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजन प्रसूता को कोमा की हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालांकि, महिला की तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों, ब्लड प्रेशर कम होने के कारण और उपचार के दौरान सामने आए घटनाक्रम को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
24 घंटे में दो मौतों के बाद फिर चिंता
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इससे पहले भी अक्टूबर में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए थे। 17 और 18 अक्टूबर की रिपोर्टों में रेशमा और रोशन बैरवा की मौत का जिक्र हुआ था। इन मामलों में अस्पताल प्रशासन ने अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताओं को कारण बताया था, जबकि परिजनों ने उपचार को लेकर सवाल उठाए थे।
इन मौतों के बाद औषधि विभाग ने अस्पताल में इस्तेमाल की जा रही छह दवाओं के उपयोग और आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाकर नमूने जांच के लिए भेजे थे।
अब एक और प्रसूता की मौत के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर प्रसव के बाद महिलाओं की हालत अचानक क्यों बिगड़ रही है। क्या इन घटनाओं के पीछे अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताएं हैं या उपचार व्यवस्था में कोई साझा कमी है? इन सवालों का जवाब जांच और चिकित्सकीय रिपोर्टों से ही सामने आ सकेगा।
लगातार हो रही मौतों के बीच जरूरी है कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों, उपचार के रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों को स्पष्ट किया जाए, ताकि मौत के वास्तविक कारण सामने आएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
