अर्थव्यवस्था और रोजगार के 4 आधार
जिनके दम पर आगे बढ़ता रहा कोटा
कोटा . कोटा शहर की पहचान उस मजबूत बुनियादी ताकत से है जिसने हर चुनौती में इसे आगे बढ़ने का हौसला दिया। कोटा स्टोन, कोटा डोरिया, पावर हब और देश की नंबर-वन कोचिंग इंडस्ट्री..ये चार ऐसे मजबूत स्तंभ हैं, जो आज भी यहाँ की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास की सबसे बड़ी नींव हैं।
1) कोचिंग : 8 हजार करोड़ का टर्नओवर
पिछले तीन दशकों में कोटा ने देश की शिक्षा व्यवस्था में अपनी अलग पहचान बनाई है। हर साल 2 लाख से अधिक विद्यार्थी यहां आते हैं। कोचिंग उद्योग के साथ हॉस्टल, पीजी, मैस, परिवहन, स्टेशनरी, हेल्थकेयर और स्थानीय व्यापार का इकोसिस्टम इसी पर निर्भर है। विभिन्न आकलनों के अनुसार कोचिंग इकोनॉमी 8 हजार करोड़ से अधिक की वार्षिक आर्थिक गतिविधि पैदा करती है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है।
2) पत्थर : 800 खदानें दे रही हैं रोजगार
डाबी, रामगंजमंडी, सुकेत और चेचट में फैली खदानें हमारी रीढ़ है। देश-विदेश के भवनों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में इस पत्थर का उपयोग होता है। इस सेक्टर का वार्षिक टर्नओवर 2,000 करोड़ से अधिक है। 800 से अधिक खदानें और 1,500 से अधिक स्टैंडर्ड स्टोन पॉलिशिंग फैक्ट्रियां हैं, जो सीधे तौर पर करीब 2.5 लाख लोगों को रोजगार देती हैं।
3) बिजली : प्रदेश का 30% उत्पादन
कोटा संभाग में प्रदेश की कुल बिजली जरूरतों का करीब 30% उत्पादन होता है। कोटा थर्मल (1,240 मेगावाट), राणा प्रताप सागर व जवाहर सागर से हाइड्रो पावर, रावतभाटा में न्यूक्लियर पावर और नए दौर में सौर व बायोमास ऊर्जा। हाड़ौती की क्षमता 8,000 मेगावाट से अधिक है। जो पूरे प्रदेश को निर्बाध ऊर्जा प्रदान करते है। वहीं, हजारों लोगों को रोजगार देता है।
4) डोरिया : 100 करोड़ का कारोबार
कोटा डोरिया साड़ी हाड़ौती की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और बेजोड़ हस्तशिल्प का प्रतीक है। इस कला को जीआई टैग का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। कैथून में 1,500 से अधिक सक्रिय करघे हैं, जिनसे 5,000 से अधिक बुनकर जुड़े हुए हैं। इस पारंपरिक क्लस्टर का सालाना कारोबार करीब 100 करोड़ है, जिसे अब ई-कॉमर्स और आधुनिक स्टार्टअप्स के जरिए वैश्विक मंच मिला है।
