आरजीएचएस में सरकारी बजट का दुरुपयोग करने वाले और फर्जीवाड़ा करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार का हंटर चला है। राज्य सरकार ने 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया। वहीं, 24 अस्पतालों पर 2.96 करोड़ का भी जुर्माना लगाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कोटा शहर पूरे घोटाले का सबसे बड़ा केन्द्र बनकर उभरा है। कुल रिकवरी का लगभग 40% हिस्सा अकेले कोटा शहर के 3 अस्पतालों से वसूला जाना इसका सबूत है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जायसवाल हॉस्पिटल कोटा से 70,45,071 रुपए का भारी जुर्माना लगाया गया है, जो पूरे राजस्थान में दूसरी सबसे बड़ी रिकवरी है। इसके बाद ईथोस हॉस्पिटल कोटा से 24,14,571 रुपए की पेनल्टी है, जो प्रदेश में चौथी सबसे बड़ी कार्रवाई है।
पांचवें स्थान पर मौजूद कोटा हार्ट इंस्टिट्यूट से 22,04,275 रुपए की रिकवरी निकाली गई है। रिकवरी की कार्रवाई के दायरे में पारस जेके हॉस्पिटल (उदयपुर), जील हॉस्पिटल (डूंगरपुर), मार्बल सिटी हॉस्पिटल (अजमेर), मणिपाल हॉस्पिटल (जयपुर), सोनी हॉस्पिटल (जयपुर), इंडस हॉस्पिटल (जयपुर) सहित कुल 24 अस्पताल शामिल हैं। इधर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार ने आरजीएचएस में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। वित्तीय अनियमितता, फर्जी क्लेम और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
ऐसी-ऐसी अनियमितताएं पाई गईं
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि ऑडिट के दौरान अस्पतालों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनमें फर्जी या डुप्लीकेट दस्तावेज के आधार पर क्लेम, जरूरत से ज्यादा जांचें कराना, एक ही पैकेज की सेवाओं को अलग-अलग दिखाकर अतिरिक्त भुगतान लेना, आवश्यक दस्तावेज के बिना क्लेम प्रस्तुत करना और ओपीडी मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी में भर्ती दिखाकर भुगतान लेना जैसी गड़बड़ियां शामिल हैं।
