नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
भामाशाहमंडी में इन दिनों जिंसों की बंपर आवक ने व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है। धान, उड़द, सोयाबीन और गेहूं सहित लगभग सभी प्रमुख फसलें बड़ी मात्रा में मंडी पहुंच रही हैं। अच्छे भाव मिलने की उम्मीद में किसान अपनी उपज लेकर लगातार आ रहे हैं, लेकिन मंडी की सीमित क्षमता और टीन शेड की कमी के कारण बड़ी मात्रा में अनाज खुले में पड़ा है। मौसम में बदलाव और बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई किसान अपनी फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखने में जुटे हैं।
मंडी प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि मंडी परिसर की वास्तविक क्षमता करीब डेढ़ से दो लाख कट्टों की है, जबकि इन दिनों आवक बढ़कर चार से छह लाख कट्टों तक पहुंच रही है। ऐसे में पूरी उपज को एक साथ परिसर में लेना संभव नहीं है। उपलब्ध जगह के अनुसार ही वाहनों और जिंसों को प्रवेश दिया जा रहा है। परिसर भर जाने पर शेष उपज को अगले दिन प्रवेश दिया जाता है, ताकि मंडी का संचालन लगातार बना रहे। अधिकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं, लेकिन अब जिंसों का उठाव होने से जगह खाली हो रही है।
अधिकारी ने बताया कि शनिवार को अकेले धान की आवक करीब दो से सवा दो लाख कट्टों तक रही। अन्य जिंसों की आवक भी तेज है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार सभी फसलों के भाव में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से किसान अधिक उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। किसानों को सुबह 11 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक का समय दिया गया है।
बारिश से बचाव के लिए मंडी में तिरपाल की व्यवस्था होने का भी दावा किया गया है। किसान तीन हजार रुपए सिक्योरिटी राशि जमा कर तिरपाल ले सकते हैं और लौटाने पर राशि वापस मिल जाती है। कई किसान अपने तिरपाल भी साथ ला रहे हैं। हालांकि किसानों का सवाल है कि जब आवक का दबाव हर साल रहता है तो पर्याप्त टीन शेड और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की जाती। अच्छे भाव मिलने की खुशी के बीच खुले में रखी फसल पर बारिश का खतरा मंडी की तैयारियों की परीक्षा ले रहा है।
