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खुद ही निवर्तमान से भूतपूर्व हो गए कोटा के दोनों महापौर, अब एक शहर-एक मेयर

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खुद ही निवर्तमान से भूतपूर्व हो गए कोटा के दोनों महापौर, अब एक शहर-एक मेयर
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कोटा। कोटा नगर निगम की सियासत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पांच साल तक शहर के दो हिस्सों की कमान संभालने वाले दोनों महापौर अब खुद ही निवर्तमान से भूतपूर्व हो गए हैं। कोटा उत्तर की महापौर मंजू मेहरा और कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल इस बार नगर निगम के चुनावी मैदान में पार्षद पद के लिए नहीं उतरे। हालांकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में बतौर निवर्तमान महापौर सक्रिय नजर आए और वार्डों में प्रचार करते रहे।

वर्ष 2020 में कोटा नगर निगम को उत्तर और दक्षिण दो हिस्सों में बांटकर चुनाव कराया गया था। उस चुनाव के बाद कांग्रेस ने दोनों निगमों में बोर्ड बनाया था। कोटा उत्तर में मंजू मेहरा और कोटा दक्षिण में राजीव अग्रवाल महापौर बने थे।

दो निगम से फिर एक हुआ कोटा

अब परिसीमन के बाद कोटा के दोनों नगर निगमों को फिर से एक कर दिया गया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण को मिलाकर एक नगर निगम बनाया गया और नए निगम में 100 वार्ड निर्धारित किए गए। ऐसे में अब शहर को दो नहीं, बल्कि एक ही महापौर मिलेगा।

इसी बदलाव के साथ मंजू मेहरा और राजीव अग्रवाल का पांच साल का महापौर कार्यकाल भी समाप्त हो गया। दोनों ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा। यही वजह है कि दोनों अब नगर निगम की नई परिषद का हिस्सा नहीं होंगे।

चुनाव मैदान से बाहर, लेकिन प्रचार में सक्रिय

दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद दोनों पूर्व महापौर चुनावी गतिविधियों से पूरी तरह दूर नहीं रहे। अपने-अपने राजनीतिक खेमों के लिए वार्डों में प्रचार करते नजर आए। यानी जिस नगर निगम की कमान दोनों ने पांच साल संभाली, उसके नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया में वे प्रत्याशी के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ता और पूर्व महापौर की भूमिका में दिखाई दिए।

अब अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर नजर

नए एकीकृत नगर निगम के पहले महापौर को लेकर भी सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। भाजपा ने वार्ड 98 की पार्षद अनुसुईया गोस्वामी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने वार्ड 17 की पार्षद सुनीता सुमन को मैदान में उतारा है। महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होना निर्धारित है।

ऐसे में अनुसुईया गोस्वामी को कोटा की अगली महापौर के तौर पर तय मानने की चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अंतिम फैसला 25 सितंबर को होने वाले चुनाव में ही होगा। मौजूदा नगर निगम में भाजपा ने 100 में से 57 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया है।

इस तरह कोटा की नगर निगम राजनीति में एक अध्याय समाप्त होकर नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। दो महापौरों वाले कोटा की जगह अब एक महापौर पूरे शहर की जिम्मेदारी संभालेगा।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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