नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन ने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कोटा में साइबर अपराध के मामले कम हैं और एफआईआर से चालान तक का अनुपात भी बेहतर है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन के स्तर पर लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस, बैंक, जिला प्रशासन और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
मुख्य सचिव गुरुवार को कोटा दौरे पर रहे। उन्होंने अभय कमांड सेंटर, साइबर थाना और मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। इससे पहले सर्किट हाउस में आईजी कोटा रेंज हरेन्द्र महावर, कलेक्टर पीयूष समारिया, शहर एसपी तेजस्वनी गौतम, ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर सहित अन्य अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। सर्किट हाउस पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
अभय कमांड सेंटर में मुख्य सचिव ने लाइव कैमरों के जरिए शहर की निगरानी व्यवस्था देखी। अधिकारियों ने बताया कि कैमरों की मदद से मारपीट सहित अन्य घटनाओं की समय रहते जानकारी मिलने से पुलिस को अपराध रोकने और त्वरित कार्रवाई में मदद मिल रही है। निरीक्षण के दौरान सेंटर के सभी कैमरे चालू मिले।
इसके बाद उन्होंने साइबर थाने का निरीक्षण कर साइबर अपराधों की रोकथाम, शिकायतों पर कार्रवाई और जांच प्रक्रिया की जानकारी ली। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रगति बैठकों और मुख्यमंत्री स्तर पर 1930 कॉल सेंटर के निरीक्षण के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में साइबर अपराध से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। भरतपुर और जयपुर के बाद टोंक और कोटा के साइबर थानों का दौरा किया गया है।
साइबर मामलों में जांच और कार्रवाई को तेज करने के लिए स्टेट लेवल बैंकिंग कोऑर्डिनेटर, साइबर क्राइम के एडीजी और डीजीपी स्तर पर बैठकें की जाएंगी। त्वरित सुनवाई के लिए विधि विभाग में स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किए जा रहे हैं। बड़े फॉर्म और इंडेमनिटी बॉन्ड जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के सुझावों पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने बताया कि साइबर कमांडोज के लिए राजस्थान पुलिस अकादमी सहित अन्य स्थानों पर विशेष ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कोटा रेंज के लिए आरसी की स्थापना भी की गई है।
