शहर पुलिस आधुनिक पुलिसिंग के दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। पहले प्रोजेक्ट के तहत IIT और IIIT के साथ मिलकर ऐसा 'एआई सॉफ्टवेयर' बनाया जा रहा है, जो अपराधी का संदिग्ध बॉडी पोस्चर या हथियार देखते ही कमांड रूम में बिना इंसानी दखल के 'रेड अलर्ट' फ्लैश हो जाएगा। दूसरा प्रोजेक्ट, बाल अपराधियों के पुनर्वास से जुड़ा है। सुधार गृहों में 18 साल के शातिर अपराधियों की सोहबत से 14-15 साल के मासूम बच्चों को बचाने के लिए कोटा पुलिस ने राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है। इसके तहत सुधार गृहों में उम्र और अपराध के आधार पर 'स्पेसिफिक सेल सिस्टम' बनाकर अपराधियों को अलग-थलग रखा जाएगा।
अपराधियों पर आर्थिक चोट, ड्रग्स माफिया पर गरुड़ प्रहार
अपराधियों की आर्थिक रूप से कमर तोड रहे हैं। अतिक्रमण पर बुलडोजर चला रहे। कोटा शहर में 'गरुड़ प्रहार' अभियान के तहत करीब 10 करोड़ की मार्केट वैल्यू की ड्रग्स (एमडी, स्मैक, गांजा) पकड़ी गई। नशे के धंधे में शामिल थड़ियों और कैफे को सील व ध्वस्त किया गया है।
कम्युनिटी पुलिसिंग में यूएन से तारीफ, पसंद आया कोटा मॉडल
कोटा पुलिस ने नए कानूनों को जमीन पर उतारकर देश भर में अलग पहचान बनाई है। अनंत चतुर्दशी, दशहरा मेला और जलझूलनी एकादशी जैसे बड़े त्योहारों पर 'सुरक्षा सखी', 'सीएलजी मेंबर्स' और 'पुलिस मित्रों' के तालमेल को संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं ने अपनी रिपोर्ट में सराहा और इसे देश के लिए मॉडल बताया। नए आपराधिक कानूनों को लागू करने में कोटा देश का पहला ऐसा जिला बना है, जिसने दोषियों को सजा के तौर पर सामुदायिक सेवा देने की शुरुआत की है।
'पिंक बूथ, पिंक पेट्रोलिंग वाहनों के प्रस्ताव भेजे
1 जुलाई से 31 जुलाई तक महिला सुरक्षा के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें वर्किंग वुमन, छात्राओं और गृहणियों के लिए सेल्फ डिफेंस क्लासेस चलाई जाएगी। 'कालिका पेट्रोलिंग यूनिट' लगातार सक्रिय है। इसके अलावा, निर्भया फंड के तहत 'पिंक बूथ' और 'पिंक पेट्रोलिंग व्हीकल्स' का प्रस्ताव भेजा गया है, जो जल्द ही धरातल पर दिखाई देंगे। छात्रों की सुरक्षा के लिए 'KSOS' (कोटा सेफ्टी ऑफ स्टूडेंट्स) ऐप में नए फीचर्स जोड़े जा रहे हैं।
