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कोटा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: बेंगलुरु से सीखी थी ठगी की तकनीक, लड़कियों को 7 दिन की ट्रेनिंग देकर कराता था साइबर फ्रॉड

जॉब के नाम पर भर्ती कर लड़कियों से कराई जाती थी कॉलिंग, दफ्तर में बोर्ड पर लिखी होती थी बात करने की स्क्रिप्ट; मास्टरमाइंड अशफाक गिरफ्तार

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कोटा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: बेंगलुरु से सीखी थी ठगी की तकनीक, लड़कियों को 7 दिन की ट्रेनिंग देकर कराता था साइबर फ्रॉड
कोटा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: बेंगलुरु से सीखी थी ठगी की तकनीक, लड़कियों को 7 दिन की ट्रेनिंग देकर कराता था साइबर फ्रॉड
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कोटा। राजस्थान के कोटा में पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग और भारी मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। जोधपुर निवासी मास्टरमाइंड मोहम्मद अशफाक बाहर से सामान्य दिखने वाले एक जॉब सेंटर की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था।

डीएसपी गंगासहाय शर्मा के अनुसार, पोस्ट ग्रेजुएट अशफाक ने साल 2020-21 में बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम करते हुए साइबर फ्रॉड के तरीके सीखे थे। इसके बाद वह भोपाल, इंदौर और मुंबई के ठगी नेटवर्कों से जुड़ा। भोपाल में खुद का सेंटर चलाने के बाद पुलिस के डर से वह करीब डेढ़ साल पहले कोटा आ गया और अपने रिश्तेदारों के साथ नया सेटअप तैयार किया।

प्लेसमेंट एजेंसी और OLX से लड़कियों की भर्ती

आरोपी ने गुमानपुरा इलाके के 'उमेश सदन' में किराए पर ऑफिस खोला। अशफाक की सोची-समझी रणनीति थी कि लोग पुरुषों की तुलना में लड़कियों की आवाज पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं। इसी का फायदा उठाने के लिए उसने OLX और स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए डेटा एंट्री और कस्टमर केयर जॉब के नाम पर लड़कियों को नौकरी पर रखा और बाद में उन्हें कॉलिंग के काम में धकेल दिया।

बोर्ड पर लिखी होती थी स्क्रिप्ट, 7 दिन की ट्रेनिंग

दफ्तर में एक बड़ा बोर्ड लगाया गया था, जिस पर बातचीत की शुरुआत कैसे करनी है और ग्राहकों के सवालों का क्या जवाब देना है, पूरा खाका लिखा रहता था। लड़कियों को 7 दिन की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती थी, जिसमें ग्राहक की आर्थिक स्थिति भांपने और उसे ट्रेडिंग में निवेश के लिए राजी करने के तरीके सिखाए जाते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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