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कोटा में डेंगू के 85 पार, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दोगुनी; मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई चिंता

शहर के अलग-अलग इलाकों में डेंगू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, लार्वा सर्वे और रोकथाम की गतिविधियां जारी

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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कोटा में डेंगू के 85 पार, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दोगुनी; मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई चिंता
कोटा में डेंगू के 85 पार, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दोगुनी; मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई चिंता
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नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा

कोटा। कोचिंगनगरी में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में अब तक डेंगू के 85 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। डेंगू के साथ अन्य मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप ने अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ा दिया है। हालात यह हैं कि इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। संभाग के बड़े अस्पतालों में मरीजों की संख्या में करीब दोगुना इजाफा होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर चिकित्सा विभाग की ओर से सर्वे और मच्छरों के लार्वा की पहचान कर उन्हें नष्ट करने की गतिविधियां की जा रही हैं, लेकिन डेंगू के बढ़ते आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं।

पिछले साल 100 से अधिक मामले, इस बार भी बढ़ रही संख्या

डेंगू के लिहाज से यह मौसम स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिछले साल कोटा में डेंगू के 100 से अधिक मामले सामने आए थे। इस साल भी अब तक मरीजों की संख्या 85 के पार पहुंच गई है। शहर के विभिन्न इलाकों से मामले सामने आने के बीच संक्रमण की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।

डेंगू के अलावा वायरल बुखार और दूसरी मौसमी बीमारियों के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को भी पंजीकरण, जांच और उपचार के दौरान भीड़ का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि मरीजों की कुल संख्या और विभिन्न बीमारियों के अलग-अलग आंकड़ों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा उपलब्ध नहीं है।

सर्वे और लार्वा गतिविधियां, फिर भी चुनौती बरकरार

डेंगू की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वे कर रही हैं। मच्छरों के लार्वा की पहचान और उन्हें नष्ट करने की गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद नए मामले सामने आने से यह स्पष्ट है कि रोकथाम के प्रयासों के साथ आमजन की भागीदारी भी जरूरी है।

डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर घरों और आसपास जमा साफ पानी में पनप सकता है। कूलर, गमले, पानी की टंकियां, पुराने टायर और खुले बर्तनों में जमा पानी इसके प्रजनन का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पानी जमा होने वाले पात्रों को नियमित रूप से खाली करना, साफ करना और ढककर रखना मच्छरों की उत्पत्ति रोकने के अहम उपाय हैं।

बुखार को हल्के में न लें

डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत मिलने पर तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।

शहर में बढ़ते मामलों के बीच जरूरी है कि घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने दिया जाए, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाए जाएं और बुखार होने पर खुद से दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह ली जाए। डेंगू पर नियंत्रण के लिए विभागीय निगरानी के साथ नागरिकों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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