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कोटा दशहरा मेला: 105 फीट ऊंचा रावण मैदान में खड़ा, 20 अक्टूबर को होगा दहन; 3डी तकनीक से करेगा अट्टहास और तलवारबाजी

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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कोटा दशहरा मेला: 105 फीट ऊंचा रावण मैदान में खड़ा, 20 अक्टूबर को होगा दहन; 3डी तकनीक से करेगा अट्टहास और तलवारबाजी
कोटा दशहरा मेला: 105 फीट ऊंचा रावण मैदान में खड़ा, 20 अक्टूबर को होगा दहन; 3डी तकनीक से करेगा अट्टहास और तलवारबाजी
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कोटा। राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के तहत दशहरा मैदान में 20 अक्टूबर को होने वाले रावण दहन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शनिवार तड़के दशहरा मैदान में 105 फीट ऊंचे रावण और 72-72 फीट ऊंचे कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले खड़े कर दिए गए। इस बार रावण का पुतला 3डी तकनीक और यांत्रिक गतिविधियों से लैस है। दहन से पहले वह 360 डिग्री पर गर्दन घुमाने, आंखें झपकाने, मूंछें हिलाने, तलवार चलाने और अट्टहास करने जैसी गतिविधियां करेगा।

महापौर अनुसुइया गोस्वामी ने बताया कि शनिवार मध्यरात्रि 12 बजे से नगर निगम की टीम और निर्माण अनुभाग के अभियंताओं की देखरेख में पुतलों को खड़ा करने का काम शुरू किया गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 7 बजे तक तीनों पुतलों को सुरक्षित रूप से स्थापित कर दिया गया। इस कार्य में निर्माण अनुभाग की टीम के साथ 45 मजदूर और अधिकारी रातभर जुटे रहे।

उन्होंने बताया कि पुतलों के लिए लोहे का मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार पुतलों को खड़ा करने का काम अधिक आसानी और सुरक्षा के साथ पूरा हो सका।

तीन भारी क्रेनों की मदद से खड़े किए पुतले

मेला अधिकारी ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि विशालकाय पुतलों को खड़ा करने के लिए 100 टन क्षमता की क्रेन, एक हाइड्रा और 65 टन क्षमता वाली क्रेन का उपयोग किया गया। इसके लिए इंदौर से तीन भारी क्रेन मंगवाई गई थीं। विशेष रूप से तैयार किए गए लोहे के मजबूत स्ट्रक्चर की मदद से पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की गई।

3डी तकनीक से रावण दिखाएगा तलवारबाजी

इस बार मेले में रावण के पुतले की तकनीक दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगी। दिल्ली-एनसीआर के कारीगर अनीस की देखरेख में तैयार किए गए पुतले में यांत्रिक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है। दहन से पहले रावण अपनी गर्दन 360 डिग्री तक घुमाएगा। इसके साथ आंखें झपकाने, मूंछें हिलाने, हाथ में पकड़ी विशाल तलवार चलाने और अट्टहास करने जैसी गतिविधियां भी होंगी।

इन विशेषताओं के चलते इस बार रावण दहन से पहले ही दशहरा मैदान में लोगों की भीड़ जुटने लगी है।

8 टन लोहा और 500 बांस से तैयार हुआ रावण का कुनबा

रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के निर्माण में पिछले दो से ढाई महीनों से करीब 15 से 20 कारीगर जुटे हुए थे। पुतलों के निर्माण में लगभग 8 टन लोहा और 500 बांस की खपच्चियों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा 1500 मीटर वेलवेट कपड़ा, 3 क्विंटल रस्सी, जापानी कागज, रद्दी, गत्ता और अन्य सामग्री का उपयोग किया गया।

रावण के साथ सेल्फी लेने पहुंच रहे लोग

दशहरा दहन से पहले अगले तीन दिनों तक शहरवासी मैदान में खड़े विशालकाय पुतलों को करीब से देख सकेंगे। शनिवार को दिनभर स्थानीय नागरिकों और युवाओं की भीड़ पुतलों को देखने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंचती रही।

पुतलों की सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्थाओं को देखते हुए दहन स्थल पर सुरक्षाकर्मियों की विशेष तैनाती की गई है। अब शहरवासियों को 20 अक्टूबर को होने वाले रावण दहन का इंतजार है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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