नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 इस बार ऐतिहासिक रोमांच और भव्यता का नया अध्याय लिखने जा रहा है। विजयादशमी के पावन पर्व पर जब श्रीराम का बाण लंकापति के नाभि-कुंड को बेधेगा, तब मैदान में खड़ा दशानन न सिर्फ विशालकाय दिखेगा, बल्कि जीवंत अभिनय करता हुआ नजर आएगा। इस बार का रावण तलवार चलाएगा, मूंछें ऐंठेगा, आंखें मटकाएगा और 360 डिग्री पर अपनी गर्दन घुमाकर दर्शकों को हैरान कर देगा। 105 फीट से भी ऊंचे इस रावण और उसके 70-70 फीट के कुनबे (कुंभकर्ण व मेघनाद) के निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है, जिसे दिल्ली-एनसीआर से आए अनुभवी कारीगर अंतिम रूप दे रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद से आए मुख्य कारीगर आमिर खान के अनुसार इस बार रावण के पुतले में विशेष आंतरिक यांत्रिक संरचना (मैकेनिकल रिग) फिट की जा रही है। इसके जरिए रावण मैदान में खड़े होकर अपनी गर्दन को चारों तरफ (360 डिग्री) घुमा सकेगा। उसके हाथ में थमी विशालकाय तलवार लहराएगी, चेहरे की विशाल मूंछें हिलेंगी और आंखें झपकती हुई दिखाई देंगी। रावण का यह एनिमेटेड और आक्रामक रूप दर्शकों के लिए अब तक का सबसे अनूठा और रोमांचक अनुभव साबित होने वाला है। आमिर वर्ष 2019 से लगातार कोटा के रावण का निर्माण करते आ रहे हैं। कारीगरों की पूरी टीम दिन-रात जुटी हुई है और 10 से 11 तारीख तक पुतलों को पूरी तरह तैयार कर खड़ा कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले साल कोटा ने 215 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में नाम दर्ज करवाया था।
5 टन लोहा, 1500 मीटर वेलवेट और 500 बांस
पुतले के निर्माण में लगे आधुनिक संसाधन
रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय ढांचों को मजबूती प्रदान करने और हवा के दबाव से बचाने के लिए इस बार विशेष धातुओं और मजबूत सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है।
लोहे की मजबूती: पुतलों की रीढ़ और आंतरिक तंत्र को सहारा देने के लिए लगभग 5 टन (5,000 किग्रा) लोहे के एंगल व पाइप का इस्तेमाल हो रहा है।
पारंपरिक बांस व रस्सियां: पुतले के बाहरी आकार को गढ़ने के लिए 500 मजबूत बांस की खपच्चियों का ढांचा तैयार किया गया है। इन्हें बांधने के लिए 300 किलो सुतली और लगभग 2 क्विंटल (200 किग्रा) मजबूत रस्सियों की खपत हो रही है।
शाही परिधान व वॉटरप्रूफिंग: रावण के कुनबे को 1500 मीटर विशेष वेलवेट (मखमल) कपड़े से तैयार किया जा रहा है। बाहरी परत के लिए वॉटरप्रूफ इम्पोर्टेड कागज का उपयोग हो रहा है, ताकि अचानक बारिश होने पर भी पुतले को नुकसान न पहुंचे।
