नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के तहत बुधवार शाम कोटा में भरत मिलाप शोभायात्रा निकाली गई। कैथूनीपोल से दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच तक निकली इस पारंपरिक शोभायात्रा में धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पौराणिक प्रसंगों का अनूठा संगम देखने को मिला। विजयश्री रंगमंच पर भगवान श्रीराम और भरत के मिलन का भावुक दृश्य देखकर हजारों दर्शक भावविभोर हो गए। दोनों भाइयों के गले मिलते ही वातावरण जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
शोभायात्रा रवाना होने से पहले कैथूनीपोल चौराहे स्थित संतोषी माता मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। महापौर अनुसूईया गोस्वामी, मेला अधिकारी एवं आयुक्त ओपी मेहरा, अतिरिक्त मेला अधिकारी महेशचंद्र गोयल, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर, पंडित गोविंद शर्मा, पार्षद सुरेन्द्र राठौर, सुनीता नायक, नवीन माथुर, मोहन सेन, नीतू कंवर और पिंटू कंवर ने भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूपों की आरती उतारी। इसके बाद शोभायात्रा को रवाना किया गया। यात्रा टिपटा, गढ़ पैलेस और किशोरपुरा दरवाजा होते हुए दशहरा मैदान पहुंची।
शोभायात्रा में रथों और बग्घियों पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, सुग्रीव, विभीषण, जामवंत, नल, नील और हनुमान की सजीव झांकियां सजाई गईं। राजाराम जैन कर्मयोगी द्वारा अभिनीत विभीषण के लंका राज्याभिषेक की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। बैंड की धुनों के बीच ऊंटगाड़ियों पर सवार महिलाएं मंगल गीत गाती हुई चलीं। लोक कलाकारों ने बिंदौरी, घूमर और कजरी नृत्य की प्रस्तुतियों से आयोजन को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच को अयोध्या की तर्ज पर सजाया गया था। भगवान श्रीराम के स्वरूप के रथ पर पहुंचते ही भरत और शत्रुघ्न ने उनका भावुक स्वागत किया। श्रीराम-भरत के मिलन के मार्मिक दृश्य ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। समारोह के बाद भव्य आतिशबाजी की गई, जिससे आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। भरत मिलाप की इस परंपरागत प्रस्तुति ने राष्ट्रीय दशहरा मेले के सांस्कृतिक आकर्षण को यादगार बना दिया।
