नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
केसरिया पताकाएं, राजसी वेशभूषा में सजे घुड़सवार, शाही गजराज, सैनिक टुकड़ियां और गूंजते राम भजन...। कहीं पुष्पवर्षा कर प्रभु श्रीराम का स्वागत तो कहीं लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियां। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के तहत गुरुवार को निकली राम बारात में आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। गीता भवन से रवाना हुई शोभायात्रा के दर्शन के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में लोग उमड़े। घरों की छतों और सड़कों के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बारात का स्वागत किया। भगवान श्रीराम को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
गीता भवन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन और महाआरती के साथ राम बारात का शुभारंभ हुआ। लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, महापौर अनुसुईया गोस्वामी, उपमहापौर विवेक राजवंशी, मेला अधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पंकज मेहता, वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद शर्मा, पूर्व महापौर राजीव अग्रवाल, भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष हेमंत विजय, गीता सत्संग आश्रम समिति के रामेश्वर विजय और गोरधन खंडेलवाल सहित पार्षदों व गणमान्य नागरिकों ने आरती कर शोभायात्रा को रवाना किया। इस दौरान आतिशबाजी हुई और जय श्रीराम के जयघोष से परिसर गूंज उठा। नगर निगम उपायुक्त भावना सिंह, धीरज सोनी और चीफ इंजीनियर महेश गोयल सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
शोभायात्रा जब दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पहुंची तो महापौर अनुसुईया गोस्वामी ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के स्वरूप को सैल्यूट कर अभिनंदन किया। श्रद्धा और सम्मान से जुड़ा यह दृश्य दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।
राम बारात में सबसे आगे शाही गजराज चला। इसके पीछे राम ध्वज थामे युवा, राजसी पगड़ी और वेशभूषा में घुड़सवार तथा हाथों में भाले लिए पैदल सैनिकों की टुकड़ियां चल रही थीं। विशाल सूर्य ध्वज के साथ पुलिस बैंड और मशक बैंड ने शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई। घोड़ा-बग्गी और ऊंटगाड़ियों के बीच मुख्य बग्गी में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न वर स्वरूप में विराजमान थे। अन्य सवारियों में राजा दशरथ, मंत्री सुमंत, महर्षि विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ के स्वरूप शामिल रहे। कर्मयोगी सेवा संस्थान की झांकी में संस्थापक राजाराम जैन 'कर्मयोगी' राजा दशरथ की भूमिका में राम कोथली लेकर चले। छत्र-चंवर और राजसी साज-सज्जा से सजी झांकी ने लोगों का ध्यान खींचा।
जबलपुर से आए 40 वादकों के अंतरराष्ट्रीय श्याम बैंड ने 'राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी', 'अयोध्या आए प्रभु राम' और 'रामजी की निकली सवारी' जैसे भजनों की धुनों से माहौल भक्तिमय कर दिया। राजस्थानी घूमर, झालावाड़ का बिंदोरी नृत्य, कच्छी घोड़ी और कजरी नृत्य के साथ पंजाबी भांगड़ा, ढोल-ताशे, नगाड़े और शहनाई की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने मंगल गीत गाए। पंजाब अखाड़े के पटेबाजों और सिख युवाओं ने गतका के तहत तलवारबाजी सहित हैरतअंगेज करतब दिखाए। डांडिया मंडलियों की प्रस्तुतियों ने भी उत्सव में रंग भरा।
गीता भवन से शुरू हुई शोभायात्रा वाल्मीकि बस्ती, सुंदर धर्मशाला, गांधीजी का पुल, कैथूनीपोल थाना, गढ़ पैलेस और टिपटा होते हुए किशोरपुरा दरवाजे से श्रीराम रंगमंच पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। मार्ग में सामाजिक संगठनों, व्यापारिक मंडलों, धार्मिक संस्थाओं और शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। आयोजन के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व यातायात के व्यापक इंतजाम किए। प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा, अतिक्रमण हटाए गए और पर्याप्त रोशनी के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी व्यवस्थाओं पर नजर रखे रहे।
