नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
कोटा। “उस खिलजी को पद्मिनी की पावनता ने हरा दिया...” ओजस्वी कवयित्री कविता तिवारी की इन पंक्तियों ने 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में राजस्थान की शौर्य गाथा को स्वर दिया। वीर रस, हास्य-व्यंग्य, राजनीतिक कटाक्ष और जीवन की जद्दोजहद पर रची कविताओं के बीच मंगलवार रात विजयश्री रंगमंच पर साहित्य का ऐसा रंग जमा कि देर रात तक हजारों श्रोता तालियां बजाते रहे। कवियों ने कहीं हास्य से गुदगुदाया तो कहीं अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से देशभक्ति और स्वाभिमान की भावना जगाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा और लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बूंदी जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंकित जैन, एसटी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री अशोक मीणा और लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश डागा मौजूद रहे। महापौर अनुसुइया गोस्वामी और मेला अधिकारी ओपी मेहरा ने अतिथियों का सूत की माला और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। प्रख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने मां सरस्वती की वंदना के साथ काव्य संध्या का आगाज किया।
हास्य ने गुदगुदाया, व्यवस्था पर भी हुए प्रहार
कवि सम्मेलन में हरिओम पंवार, सत्यनारायण सत्तन, जगदीश सोलंकी, शशिकांत यादव, चेतन चर्चित, विनीत चौहान, सुंदर कटारिया, शायरा अंजुम रहबर और कवयित्री कविता तिवारी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। सुंदर कटारिया ने ‘शराबी और घरवाली’ विषय पर हास्य कविताओं से श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान पंडाल हंसी से गूंजता रहा।
शशिकांत यादव ने अपनी व्यंग्यात्मक पंक्तियों से समकालीन व्यवस्था और राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने राम के नाम पर राजनीति करने वालों और उनके दावों पर सवाल उठाते हुए तीखे कटाक्ष किए। चेतन चर्चित ने भी राजनीतिक व्यंग्य के साथ जीवन की जिम्मेदारियों और मजबूरियों को अपनी रचनाओं में जगह दी। उनकी पंक्तियां—“मजबूरियों ने ऐसे मोड़ पर ला दिया, वक्त से पहले मुझे बड़ा होना पड़ा”—ने श्रोताओं को जिंदगी की चुनौतियों से रूबरू कराया।
वीर रस की कविताओं में गूंजा राजस्थान का शौर्य
कवयित्री कविता तिवारी ने बुलंद आवाज और ओजपूर्ण अंदाज में राष्ट्रभाव से जुड़ी रचनाएं सुनाईं। तिरंगे, चंबल की रवानी और स्वाभिमान का उल्लेख करते हुए उन्होंने राजस्थान की वीर परंपरा को कविता में पिरोया। पद्मिनी की पावनता और खिलजी का जिक्र करती उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं का ध्यान खींचा।
अलवर से आए ओज कवि विनीत चौहान ने राजस्थान के त्याग, बलिदान और जौहर की गाथाओं को काव्यपाठ के जरिए जीवंत किया। राजपूती आन-बान और स्वाभिमान पर केंद्रित उनकी रचनाओं पर भी श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साह जताया।
विजयश्री रंगमंच पर सजी इस साहित्यिक संध्या में अलग-अलग काव्य विधाओं के जरिए देश, समाज, राजनीति और व्यक्ति के जीवन से जुड़े मुद्दे सामने आए। देर रात तक तालियों और भारत माता के जयकारों के बीच कवियों का उत्साहवर्धन होता रहा। आयोजन समिति ने अतिथियों, रचनाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
