कोटा। राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 की सांस्कृतिक संध्या में बुधवार को संगीत और मस्ती का ऐसा रंग जमा कि विजयश्री रंगमंच देर रात तक झूमता रहा। 'सिने संध्या स्टार नाइट' में लोकप्रिय गायक मीका सिंह ने अपने सुपरहिट बॉलीवुड गीतों, सूफी नगमों और पंजाबी गानों से हजारों दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। 'सावन में लग गई आग' से लेकर 'मौजा ही मौजा' और 'गंदी बात' तक गानों की ऐसी फेहरिस्त सजी कि दर्शकों के बीच बार-बार 'वंस मोर' के नारे गूंजते रहे।
मीका सिंह ने मंच पर पहुंचते ही 'जय श्रीराम' कहकर दर्शकों का अभिवादन किया। इसके साथ ही पूरा मैदान तालियों और सीटियों से गूंज उठा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत सूफी गीत 'दमादम मस्त कलंदर' से की। इसके बाद राजस्थानी स्वागत गीत 'केसरिया बालम' गुनगुनाकर स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव दिखाया। फिल्म 'सुल्तान' के गीत 'लगे 440 वॉट तेरे छूने से' और किशोर कुमार के सदाबहार नगमे 'इंतहा हो गई इंतजार की' ने कार्यक्रम में संगीत के अलग-अलग रंग घोल दिए।
कार्यक्रम का सबसे जोशीला दौर तब आया, जब मीका सिंह ने 'सावन में लग गई आग' के ओरिजिनल और रीमिक्स अंदाज से दर्शकों में उत्साह भर दिया। इसके बाद 'तुम पर हम हैं अटके यारा', 'बचना ए हसीनों' और 'ओम शांति ओम' जैसे गीतों ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। फिल्म 'देसी बॉयज' के 'सुबह होने न दे' और 'जब वी मेट' के 'मौजा ही मौजा' पर दर्शक भी गुनगुनाते और झूमते नजर आए।
बॉलीवुड के चार्टबस्टर्स की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मीका ने 'आंख मारे', 'जुम्मे की रात', 'आज की पार्टी', 'गंदी बात', 'हवा हवा', 'पोस्टर लगवा दो', 'तू मेरे अगल बगल है' और 'ढिंकाचिका' जैसे लोकप्रिय गीत सुनाए। 'बस एक किंग', 'पुंगी', 'इब्न-ए-बतूता' और 'जादू की झप्पी' पर भी दर्शकों ने खूब आनंद लिया। पंजाबी फोक गीत 'जुत्ती मेरी' और वेडिंग ट्रैक 'दिन शगना' ने संगीत संध्या में लोक और भावनाओं का रंग भी जोड़ा। 'मुखड़ा देख के' के साथ कार्यक्रम का उत्साह देर रात तक बना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, विधायक संदीप शर्मा, इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी कोटा के अध्यक्ष राजेश बिरला और राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता अतिथि के रूप में मौजूद रहे। नगर निगम की महापौर अनुसुइया गोस्वामी, उप महापौर विवेक राजवंशी और मेला अधिकारी ओपी मेहरा ने कलाकारों एवं अतिथियों का साफा पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। हजारों की संख्या में पहुंचे संगीत प्रेमियों के लिए यह संध्या दशहरा मेले की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल रही।
