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विजयश्री रंगमंच पर बिखरे राजस्थानी लोक संस्कृति के रंग, कृष्ण महारास ने मोहा मन

चरी नृत्य और पर्दा भवई ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, लंगा गायकी से गूंजा दशहरा मेला

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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विजयश्री रंगमंच पर बिखरे राजस्थानी लोक संस्कृति के रंग, कृष्ण महारास ने मोहा मन
विजयश्री रंगमंच पर बिखरे राजस्थानी लोक संस्कृति के रंग, कृष्ण महारास ने मोहा मन
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कोटा, 24 अक्टूबर। 133वें राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के तहत शुक्रवार को विजयश्री रंगमंच पर राजस्थानी लोक संस्कृति और परंपराओं की रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। राजस्थान पर्यटन विभाग और नगर निगम कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने लोकगीत, लोकनृत्य, वादन और शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। चरी नृत्य, पर्दा भवई और कृष्ण महारास की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर नगर निगम कोटा के पूर्व उपमहापौर योगेन्द्र खींची, नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर जितेन्द्र सिंह राजावत, भाजपा कोटा शहर के सहकारिता प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष महीप सिंह सौलंकी और ब्राह्मण कल्याण परिषद के संयोजक अनिल तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महापौर अनुसूया गोस्वामी और मेला अधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा ने अतिथियों का स्वागत किया।

लंगा गायकी से हुई सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत बाड़मेर के भुट्टा खां लंगा पार्टी ने प्रसिद्ध राजस्थानी गीत ‘केसरिया बालम आओ पधारो म्हारे देस’ से की। खड़ताल की लय और लोक गायकी के सुरों ने माहौल को राजस्थानी रंग में रंग दिया। कलाकारों ने ‘बेचुरा बेचुरा’ और ‘दमादम मस्त कलंदर’ जैसे गीत भी प्रस्तुत किए।

इसके बाद कोटा के कुणाल गंधर्व ने ‘नीम की निमौली मारे’ और ‘प्यारो लागे म्हारो राजस्थान’ गीतों पर ग्रामीण भवाई नृत्य की प्रस्तुति दी। कोटा की विनिता चौहान और बाड़मेर की लीला देवी ने बिन्दौरी नृत्य से दर्शकों का ध्यान खींचा। अलवर के पद्मश्री सम्मानित कलाकार गफरूद्दीन मेवाती ने भपंग वादन किया, जबकि कोटा की बरखा जोशी ने शास्त्रीय कथक और रामदयाल छाबड़ा ने चकरी नृत्य प्रस्तुत किया।

कोटा की रितु जोशी ने लोकगीत गायन किया। अजमेर की अरूशिखा खांगारोत एवं उनके दल ने घूमर नृत्य और सहरिया स्वांग की प्रस्तुतियां दीं।

सिर पर जलते मटके रखकर किया चरी नृत्य

सांस्कृतिक संध्या में अजमेर की अरूशिखा खांगारोत की चरी नृत्य प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण रही। उन्होंने सिर पर प्रज्वलित मटकियां रखकर संतुलन और कौशल के साथ नृत्य किया। पारंपरिक लोक कला की इस प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

पर्दा भवई ने दिखाया अद्भुत कौशल

कार्यक्रम के उत्तरार्ध में बाड़मेर के गौतम परमार और भुट्टा खां ने रोमांचक पर्दा भवई नृत्य प्रस्तुत किया। संतुलन और शारीरिक कौशल से भरपूर इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अचंभित कर दिया। इसके बाद ‘डेजर्ट सिम्फनी’ की जुगलबंदी ने सांस्कृतिक संध्या में संगीत का नया रंग जोड़ा।

कृष्ण महारास के साथ हुआ समापन

सांस्कृतिक संध्या का समापन डीग (भरतपुर) के अशोक शर्मा और उनके दल की कृष्ण महारास नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ। भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रासलीला पर आधारित इस प्रस्तुति ने विजयश्री रंगमंच पर भक्तिमय वातावरण बना दिया। लोक संस्कृति, संगीत और भक्ति के संगम से सजी इस संध्या में दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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