नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
कोटा। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले की सांस्कृतिक संध्या में श्रीराम रंगमंच भक्ति संगीत, नृत्य और भारतीय लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। ‘राम रसधार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम’ के तहत बरखा जोशी और उनके ग्रुप के कलाकारों ने प्रभु श्रीराम की स्तुति से लेकर श्रीकृष्ण लीला पर आधारित महारास तक की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। पूरा प्रांगण रामभक्ति के गीतों और जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीगणेश की वंदना से हुई। इसके बाद कलाकारों ने श्रीराम भक्ति पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन’ की धुन पर प्रस्तुत नृत्य नाटिका संध्या का प्रमुख आकर्षण रही। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय और नृत्य के माध्यम से प्रभु श्रीराम की आराधना को मंच पर साकार किया। इसके बाद ‘अलबेला सजन आयो रे’ गीत पर समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें शास्त्रीय और लोक कला की झलक देखने को मिली।
बरखा जोशी ने ‘रघुवर तेरी राह निहारे’ और ‘रघु प्रीत’ जैसे भजनों पर एकल नृत्य प्रस्तुत किया। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं और संगीत के साथ तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में ‘हनुमान लाला’ की प्रस्तुति ने भी भक्ति का माहौल बनाया।
सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण श्रीकृष्ण लीला पर आधारित महारास रहा। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने कृष्ण और गोपियों की रासलीला को नृत्य, संगीत और अभिनय के जरिए मंच पर जीवंत किया। तालबद्ध कदमों और मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कृष्णभक्ति के रंग में रंग दिया। रामभक्ति से शुरू हुई सांस्कृतिक संध्या का समापन महारास की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ।
