कोटा, 22 अक्टूबर। राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के तहत गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर आयोजित सिंधी सांस्कृतिक संध्या में सिंधी संगीत, सूफी कलाम और आधुनिक फ्यूजन की धुनें गूंज उठीं। मुंबई के प्रसिद्ध सिंधी गायक, गीतकार और संगीतकार रॉकस्टार नील तलरेजा ने अपनी लाइव प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा।
पारंपरिक सिंधी लोकगीतों से लेकर आधुनिक बीट्स पर आधारित फ्यूजन तक, कार्यक्रम में संगीत के कई रंग देखने को मिले।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में निम्बाहेड़ा विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी, विधायक संदीप शर्मा, महापौर अनुसुईया गोस्वामी, मेला अधिकारी ओपी मेहरा, ओम आडवाणी, प्रेम भाटिया, विजय दासवानी, गिरधारी पंजवानी, महेश आहूजा और संजना झमटानी सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
उपायुक्त भावना सिंह, अतिरिक्त मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल और मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर सहित कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
‘आयोलाल सबिछो’ से किया अभिवादन, गूंजे झूलेलाल के जयकारे
मंच पर पहुंचते ही गायक नील तलरेजा ने ‘आयोलाल सबिछो’ कहकर श्रोताओं का अभिवादन किया। इसके साथ ही पांडाल में झूलेलाल के जयकारे गूंजने लगे और माहौल भक्तिमय हो गया। नील ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत ‘हां मां सिंधी आहियां…’ गीत से की। इस गीत के माध्यम से उन्होंने दुनिया के हर कोने में रहने वाले सिंधी समाज को अपनी संस्कृति और पहचान पर गर्व करने का संदेश दिया।
प्रस्तुति के दौरान उन्होंने सिंधी सभ्यता की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए श्रोताओं से हाथ और मोबाइल फोन की बैटरी ऊंची कर उत्साह दिखाने का आह्वान किया। गीत के दौरान दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया।
‘झूलेलाल मैशअप’ से ‘फकीराणी तबीयत’ तक छाया संगीत
कार्यक्रम में ‘द झूलेलाल मैशअप’ के लोकप्रिय बोल ‘वाह वाह झूलन बाबा, वाह वाह लालन बाबा’ ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद प्रस्तुत ‘सिंधी मेड़ले’ में पुरानी और सदाबहार सिंधी लोक धुनों को फ्यूजन के अंदाज में पेश किया गया। इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को पारंपरिक संगीत की यादें ताजा कराईं।
सूफियाना और रोमांटिक अंदाज वाले गीत ‘फकीराणी तबीयत’ को भी दर्शकों की सराहना मिली। इसके अलावा ‘दिलबर दुलारा’, ‘हिना दिल ज्यून’, ‘चर्यो आह्यां’, ‘जरूरी त नाहे’ और ‘सदके वञां’ जैसे गीतों ने संगीत संध्या में रंग जमाया।
अपने लोकप्रिय गीत ‘दारू दवा’ से देश-विदेश में पहचान बनाने वाले नील तलरेजा की प्रस्तुति पर दर्शक थिरकते नजर आए। पारंपरिक धुनों और आधुनिक संगीत के मेल ने कार्यक्रम को खास बनाया।
‘दम दमादम कलंदर’ पर एक साथ झूमे दर्शक
सांस्कृतिक संध्या के अंतिम चरण में ‘ऊहो हथ मथे करे…’, ‘जियो सिंधी सोना’, ‘सिंधी अब्बाणि बोली… मिठड़ी बानी बोली…’ और ‘जी ले लालण, जीवे साइयां…’ जैसे गीत प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन प्रसिद्ध सूफी तराने ‘दम दमादम कलंदर’ की प्रस्तुति के साथ हुआ। इस दौरान पांडाल में मौजूद दर्शक संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए।
रॉकस्टार नील तलरेजा ने पारंपरिक सिंधी संगीत को आधुनिक बीट्स के साथ जोड़कर पेश किया। कार्यक्रम में लोक धुनों, सूफी संगीत और फ्यूजन की प्रस्तुतियों के जरिए सिंधी संस्कृति की झलक देखने को मिली। दशहरा मेले की इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर दिया।
