नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने, खाली पड़े व्यावसायिक स्थानों का उपयोग करने और शहरवासियों सहित बाहर से आने वाले आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार देर रात महापौर अनुसुईया गोस्वामी, मेला अधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा और पूर्व महापौर राजीव भारती ने मेला परिसर का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण में नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान महापौर ने मेले में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन दुकानों को पिछले चार वर्षों से किराए पर नहीं लिया गया है, उनकी अलग सूची तैयार की जाए। मेला परिसर में खाली पड़े शेड और बंद स्थायी दुकानों को आवंटित करने के लिए प्रभावी योजना बनाने के निर्देश भी दिए, ताकि इन स्थानों का उपयोग हो सके और मेले में कारोबार की गतिविधियां बढ़ें।
महापौर ने फेज-2 क्षेत्र में प्रदर्शनियां लगाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने को कहा। इसके साथ ही बेडशीट और मोबाइल जैसे उत्पादों के अलग-अलग बाजार विकसित करने का सुझाव दिया। इससे एक ओर दुकानदारों को कारोबार के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे, वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी करने में आसानी होगी।
क्यूआर कोड से मिलेगा मेले का नक्शा
नगर निगम आयुक्त एवं मेला अधिकारी ओमप्रकाश मेहरा ने मेला परिसर को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया, जिसके माध्यम से आगंतुक अपने मोबाइल से कोड स्कैन कर पूरे मेले का नक्शा देख सकेंगे। इससे दुकानों, विभिन्न गतिविधियों और मेला परिसर के प्रमुख स्थानों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकेगी।
आयुक्त ने मेले में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए रामायण के विभिन्न प्रसंगों और पात्रों पर आधारित कलाकृतियां लगाने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार, इससे मेला परिसर में सांस्कृतिक आकर्षण बढ़ेगा और दर्शकों को मनोरंजन के साथ धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिलेगा।
कम आवाजाही वाले क्षेत्रों में बनेगा किड्स जोन
निरीक्षण के दौरान उन स्थानों को भी उपयोगी बनाने पर चर्चा हुई, जहां सामान्यतः लोगों की आवाजाही कम रहती है। ऐसे स्थानों पर बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष किड्स जोन विकसित करने का सुझाव दिया गया। यहां कठपुतली शो, जादू के कार्यक्रम और कॉमेडी शो आयोजित किए जा सकते हैं। इससे बच्चों और परिवारों को मनोरंजन के अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे तथा मेला परिसर के कम व्यस्त रहने वाले हिस्सों में भी चहल-पहल बढ़ाई जा सकेगी।
मुख्य प्रवेश द्वारों पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक द्वारों की ओर आगंतुकों को भेजने की व्यवस्था तैयार करने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की प्रभावी योजना बनाने की जरूरत बताई गई, ताकि मेले में आने-जाने के दौरान लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
तीन पारियों में सफाई और रोशनी पर जोर
महापौर अनुसुईया गोस्वामी ने मेला परिसर में स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए 24 घंटे सफाई व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके लिए तीन पारियों में सफाई कार्य कराने और सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को देखते हुए सफाई व्यवस्था में निरंतरता जरूरी है।
महापौर ने पूरे मेला परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने, बाहरी क्षेत्रों में रामध्वज लगाने और शहर के प्रमुख मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाने के निर्देश भी दिए। लाइटिंग और सजावट में नयापन लाने पर जोर दिया गया, ताकि कोटा आने वाले पर्यटकों और शहरवासियों को मेले का बेहतर अनुभव मिल सके।
निरीक्षण के दौरान व्यापारिक सुविधाओं, डिजिटल व्यवस्था, मनोरंजन, स्वच्छता, रोशनी और भीड़ प्रबंधन से जुड़े विभिन्न सुझाव सामने आए। अब इन प्रस्तावों पर अमल और व्यवस्थाओं में सुधार से यह तय होगा कि मेला परिसर के व्यावसायिक स्थानों का कितना बेहतर उपयोग हो पाता है और आगंतुकों को कितनी सुविधाएं मिलती हैं।
