नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के तहत आयोजित श्रीराम लीला का बुधवार को भव्य राम राज्याभिषेक के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, हनुमान की सिंदूर लीला, भरत मिलाप, राज्याभिषेक और लव-कुश लीला का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के राजगद्दी पर विराजमान होते ही मेला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। भरत मिलाप के भावुक प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पार्षद रामावतार विजय, विजय बाकोलिया, लक्ष्मीचंद तथा अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी जितेंद्र बग्गा और परिहार ने भगवान श्रीराम के दरबार की झांकी का विधि-विधान से पूजन और आरती कर किया। अंतिम दिन श्रीराघवेन्द्र कला संस्थान के कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन किया।
रावण वध के बाद भगवान श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजपाट सौंपा और माता सीता व लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। श्रीराम के आगमन की सूचना से अयोध्यावासियों में हर्ष छा गया। भरत और शत्रुघ्न पूरी प्रजा के साथ उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। अयोध्या पहुंचने पर श्रीराम सबसे पहले माता कैकेयी से मिले और इसके बाद भाई भरत को गले लगाया। दोनों भाइयों के मिलन का भावुक दृश्य देखकर मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
हनुमान भक्ति के प्रसंगों ने दर्शकों को हंसाया और आनंदित किया, वहीं लव-कुश लीला के ओजस्वी मंचन ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। भरत मिलाप के बाद भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां हुईं। गुरु वशिष्ठ ने राजगद्दी पर विराजमान श्रीराम का राजतिलक कर रामराज्य की स्थापना का प्रसंग प्रस्तुत किया। इस दौरान विशाल जनसमुदाय ने पुष्पवर्षा कर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया। जयकारों के बीच श्रीराम लीला का समापन हुआ।
