नागरिक अभिव्यक्ति @ कोटा
राष्ट्रीय दशहरा मेला में गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर शास्त्रीय संगीत की ऐसी महफिल सजी कि वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 'झंकार' कार्यक्रम के तहत आयोजित 'ताल कचहरी' में तबला, पखावज, मृदंगम और घटम की थाप के बीच सुर, ताल और लय का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों की शानदार लयकारी और सवाल-जवाब की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया। धीमी लय से शुरू हुआ संगीत का सफर जब द्रुत गति तक पहुंचा तो वाद्य यंत्रों की थाप ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर अनुसुइया गोस्वामी सहित अतिथियों ने भगवान श्रीगणेश और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर बैरवा विकास समिति के अध्यक्ष रामरतन बैरवा, भाजपा कोटा शहर के जिला उपाध्यक्ष रामावतार मराठा, जिला मंत्री श्याम दोहडिया, अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ नई दिल्ली के राष्ट्रीय महासचिव नन्दलाल प्रजापति तथा अखिल भारतीय रायका रेबारी देवासी महासभा राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष मेघराज रायका मौजूद रहे।
तीन ताल से द्रुत लय तक जुगलबंदी
'ताल कचहरी' की शुरुआत पारंपरिक वाद्य यंत्रों की वंदना और 'केसरिया बालम पधारो म्हारे देश' की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद तबला, पखावज, मृदंगम और घटम के कलाकारों ने तीन ताल, झपताल और एकताल की विभिन्न शैलियों में जुगलबंदी पेश की। अलग-अलग वाद्य यंत्रों की लय और थाप के बीच कलाकारों का तालमेल दर्शनीय रहा। एक-दूसरे की धुनों का जवाब देते कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ उस्तादों के साथ युवाओं ने भी दिखाया हुनर
कार्यक्रम में वरिष्ठ उस्तादों ने 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो' जैसे भजनों पर अपनी वादन कला का प्रदर्शन किया। युवा कलाकारों ने भी एकल वादन से श्रोताओं का ध्यान खींचा। द्रुत गति में सोलो वादन और फिर अलग-अलग वाद्य यंत्रों के बीच सवाल-जवाब की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहीं। कलाकारों की अंगुलियों की थाप से वाद्य यंत्रों से निकलती मधुर ध्वनियों ने शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का अहसास कराया।
