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राष्ट्रीय दशहरा मेला: विजयश्री रंगमंच पर सजेगी लोक संस्कृति की महफिल, आज पर्यटन विभाग की सांस्कृतिक संध्या

कालबेलिया, घूमर, चकरी और मयूर नृत्य की दिखेगी छटा, मांड गायन व पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी से गूंजेगा रंगमंच

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राष्ट्रीय दशहरा मेला: विजयश्री रंगमंच पर सजेगी लोक संस्कृति की महफिल, आज पर्यटन विभाग की सांस्कृतिक संध्या
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नागरिक अभिव्यक्ति | कोटा, 22 अक्टूबर। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 में शुक्रवार शाम राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और संगीत के रंग देखने को मिलेंगे। मेले के विजयश्री रंगमंच पर पर्यटन विभाग की ओर से शाम 8 बजे विशेष सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं और लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दर्शकों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगी।

महापौर अनुसूईया गोस्वामी ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या में राजस्थान के पारंपरिक गीत-संगीत और लोक कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की सुमधुर जुगलबंदी के साथ प्रदेश का विश्वप्रसिद्ध मांड गायन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न लोक नृत्य शैलियां मंच पर राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की झलक पेश करेंगी।

लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

सांस्कृतिक कार्यक्रम में कालबेलिया नृत्य की आकर्षक थिरकन, चकरी नृत्य की गति, तेरहताली नृत्य की अनूठी शैली और बिंदोरी नृत्य का उत्साह देखने को मिलेगा। वहीं, मयूर नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति और राजस्थान की पहचान माने जाने वाले घूमर नृत्य की छटा भी दर्शकों को आकर्षित करेगी।

लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं, वेशभूषा, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर साकार करेंगे। आयोजन का उद्देश्य मेले में आने वाले शहरवासियों और पर्यटकों को राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति से परिचित कराना है।

शाम 7 बजे स्थानीय कलाकार देंगे प्रस्तुतियां

मेला अधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा ने बताया कि पर्यटन विभाग के प्रमुख कलाकारों की प्रस्तुतियों से पहले शाम 7 बजे स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त होगा।

राष्ट्रीय दशहरा मेला शहरवासियों के लिए मनोरंजन के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर भी बन रहा है। विजयश्री रंगमंच पर आयोजित होने वाली इस सांस्कृतिक संध्या में लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक कलाओं के जरिए मेले की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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