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लेजर की रोशनी में जीवंत हुआ कोटा दशहरा मेले का गौरवशाली इतिहास

दुर्गा चालीसा से शुरुआत, विजयश्री रंगमंच पर आधुनिक तकनीक से दिखाई सांस्कृतिक विरासत

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नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा

कोटा, 1 नवंबर। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के तहत रविवार शाम विजयश्री रंगमंच पर आयोजित लेजर एवं साउंड शो में कोटा की ऐतिहासिक विरासत और दशहरा मेले का गौरवशाली इतिहास रोशनी और संगीत के जरिए जीवंत हो उठा। रंग-बिरंगी लेजर किरणों और कर्णप्रिय धुनों ने दर्शकों को आकर्षित किया। आधुनिक तकनीक के माध्यम से कोटा की सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और दशहरा मेले के विकास की गाथा प्रस्तुत की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ कोटा नागरिक सहकारी बैंक की संचालक पद्मिनी हाड़ा, भाजपा शहर जिला महामंत्री रितेश चित्तौड़ा, मंडल अध्यक्ष महावीर नायक बिल्लू, दीनू बंजारा, सुनील जायसवाल, वक्फ बोर्ड के पूर्व जिला अध्यक्ष निजामुद्दीन बबलू, संजय बूलीवाल और सामाजिक कार्यकर्ता रजनी शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।

शो की शुरुआत दुर्गा चालीसा के पाठ और ‘जय जय महिषासुर मर्दिनी’ की भक्तिमय धुनों के साथ हुई। संगीत के साथ तालमेल बिठाती लेजर किरणों ने विजयश्री रंगमंच को आकर्षक रोशनी से भर दिया। बदलते रंगों और प्रकाश के दृश्यों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।

लेजर शो में कोटा के ऐतिहासिक दशहरा मेले की यात्रा भी दिखाई गई। प्रस्तुति के अनुसार, मेले की शुरुआत 18वीं शताब्दी में महाराव दुर्जनशाल हाड़ा के शासनकाल में हुई थी। महाराव उम्मेद सिंह के समय इसने बड़े जनउत्सव का स्वरूप धारण किया। वर्ष 1921 में कोटा नगरपालिका की स्थापना के बाद मेले को व्यापक और आधुनिक विस्तार मिला। ऐतिहासिक प्रसंगों को लेजर और साउंड के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को कोटा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से रूबरू कराया गया।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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