नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
कोटा। 133वें राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के अंतर्गत श्रीराम रंगमंच पर चल रही रामलीला में रविवार को सुग्रीव मिलन, बाली वध और सुंदरकांड के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। अवकाश का दिन होने के कारण रामलीला प्रांगण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने जीवंत अभिनय, प्रभावी संवाद और रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
विभिन्न प्रसंगों के दौरान प्रांगण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में महापौर अनुसुईया गोस्वामी, महिला नागरिक सहकारी बैंक की अध्यक्ष मंजू निराला, हितकारी विद्यालय सहकारी शिक्षा समिति के निदेशक संजू बिरला, मंजू बिरला, संतोष मरचुनिया, रचना पंडोतिया, कोटा उपभोक्ता होलसेल भंडार लिमिटेड की निदेशक निशा काबरा तथा महिला नागरिक सहकारी बैंक की पूर्व निदेशक नीता दीपपुरा ने राम-जानकी और लक्ष्मण के स्वरूपों के साथ रामचरितमानस का पूजन किया। इसके बाद पार्षद ओमप्रकाश काबरा, पार्षद सीमा चौधरी, प्रमिला वर्मा, पुरुषोत्तम यादव, कौशल शर्मा, सुनीता नायक, विकास दाधीच, पूर्व पार्षद रेखा गोस्वामी, समाजसेवी सुमित जांगिड़ और रामावतार विजय ने आरती की।
लीला की शुरुआत भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता के प्रसंग से हुई। कलाकारों ने मित्रता, धर्म और नीति के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद बाली वध के प्रसंग का मंचन हुआ। अन्याय के विरुद्ध न्याय की स्थापना से जुड़े इस दृश्य पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
सुंदरकांड की चौपाइयों से भक्तिमय हुआ वातावरण
रामलीला के उत्तरार्ध में हनुमानजी के लंका प्रस्थान, सीता माता की खोज और अशोक वाटिका में संवाद सहित सुंदरकांड के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने रामचरितमानस की चौपाइयों और शास्त्रीय व लोक धुनों के माध्यम से प्रसंगों को जीवंत बनाया। चौपाइयों की प्रस्तुति के दौरान दर्शक भक्ति भाव में डूबे नजर आए। प्रत्येक प्रमुख दृश्य के समापन पर तालियों और जयकारों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया गया।
महापौर अनुसुईया गोस्वामी ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेला समिति की ओर से दर्शकों के बैठने और सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। रविवार को बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों के कारण श्रीराम रंगमंच परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा।
