नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
कोटा, 1 नवंबर। जीवन में परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन उनका सामना किस तरह करना है, यह हमारे हाथ में होता है। घटना का होना हमारे नियंत्रण में नहीं, लेकिन उसमें रंग भरना पूरी तरह हमारे हाथ में है। यह जीवन का सूत्र प्रसिद्ध मोटिवेशनल वक्ता सोनू शर्मा ने रविवार शाम 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के तहत विजयश्री रंगमंच पर आयोजित प्रेरक कार्यक्रम में दिया। उन्होंने रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों के माध्यम से जीवन, परिवार, रिश्तों, संघर्ष और सफलता के कई सूत्र समझाए। कार्यक्रम के दौरान जय श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
सोनू शर्मा ने कहा कि कोटा का दशहरा मेला देश के प्रतिष्ठित मेलों में शामिल है। उन्होंने कहा, 'जिस दशहरा मेले में भगवान राम की चर्चा न हो, वहां आना बेकार है।' भगवान राम के वनवास का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक ओर उनके राज्याभिषेक की तैयारियां थीं, दूसरी ओर अचानक वनवास का निर्णय सामने आ गया। इसके बावजूद राम ने कैकेयी के प्रति मन में द्वेष नहीं रखा। परिस्थितियों को स्वीकार कर मर्यादा और धैर्य बनाए रखने का उनका यही गुण उन्हें पुरुषोत्तम बनाता है।
परिवार और संपत्ति विवाद का उदाहरण देते हुए शर्मा ने राम और भरत के चरित्र को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज जमीन-जायदाद के विवादों में परिवार टूट रहे हैं, जबकि रामायण में एक भाई राजपाट देने को तैयार है और दूसरा उसे लेने के लिए तैयार नहीं। भरत का त्याग और राम का भाई के प्रति प्रेम परिवार को जोड़ने वाली भावना का उदाहरण है। उन्होंने 'तुम मम प्रिय भरत सम भाई' के प्रसंग के माध्यम से रिश्तों में त्याग, विश्वास और सम्मान का महत्व समझाया।
हनुमानजी के चरित्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में अपनी शक्ति का उपयोग कब और कहां करना है, यह समझना भी उतना ही जरूरी है जितना शक्ति होना। हनुमानजी के ब्रह्मफाश में स्वयं बंध जाने के प्रसंग से उन्होंने समझाया कि हर परिस्थिति में बल प्रदर्शन जरूरी नहीं होता। कई बार बुद्धि, धैर्य और समय की समझ ही सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य पर लगातार आगे बढ़ने और चुनौतियों के कारण रास्ते में रुकने से बचने की अपील की।
सुंदरकांड और लंका दहन के प्रसंग को जोड़ते हुए सोनू शर्मा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आपकी प्रतिष्ठा या प्रगति को कम करने का प्रयास करे तो उससे उलझने के बजाय अपनी ऊंचाई बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने हनुमानजी की पूंछ का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों की सफलता और यश से परेशान होने वाले लोगों के सामने अपना काम और बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए एक सरल आदत अपनाने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि सुबह उठकर रोज कम से कम 15 मिनट किसी अच्छी पुस्तक का अध्ययन करें। पुस्तक का विषय कोई भी हो सकता है, लेकिन नियमित पढ़ने की आदत व्यक्ति की सोच और जीवन की दिशा बदल सकती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर शिक्षाविद कुलदीप श्रीवास्तव, आनंद राठी, दिलीप अरोड़ा, एसटी मोर्चा भाजपा के अशोक मीणा, राज दाधीच, डॉ. अंशुमान अग्रवाल और डॉ. रुद्रेश तिवारी ने दीप प्रज्वलित किया। आयुक्त ओपी मेहरा, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर, कमल मालव और जितेंद्र बग्गा ने अतिथियों का स्वागत किया। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने प्रेरक प्रसंगों और जीवन से जुड़े संदेशों पर तालियों के साथ वक्ता का उत्साह बढ़ाया।
