कोटा, 26 अक्टूबर। राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के तहत रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर विजयश्री रंगमंच पर भजन संध्या आयोजित की गई। प्रसिद्ध भजन गायिका तृप्ति शाक्य की प्रस्तुतियों ने मेले में पहुंचे श्रोताओं को भक्ति के रंग में रंग दिया। ‘कभी राम बनकर, कभी श्याम बनकर चले आना’ सहित उनके लोकप्रिय भजनों पर श्रोताओं ने जयकारे लगाए। चांदनी रात में देर तक चले कार्यक्रम में भक्ति और संगीत का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राजेश बिरला, पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल, पूर्व जिला प्रमुख राकेश बोयत, भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनी, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कविता पचवारिया, सुरभि झामनानी, अपर्णा सैनी, महीप सोलंकी, सुनील जायसवाल, पद्मिनी हाड़ा, पंकज जायसवाल और जयेंद्र सिंह सोलंकी सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
महापौर अनुसुईया गोस्वामी, उपायुक्त एवं सहायक मेला अधिकारी धीरज कुमार सोनी, मुख्य अभियंता एवं सहायक मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर तथा पार्षद सीमा चौधरी और सुनीता नायक ने अतिथियों का स्वागत किया।
गणेश वंदना से हुई शुरुआत
तृप्ति शाक्य ने ‘देवा ओ देवा गणपति देवा...’ गणेश वंदना से भजन संध्या की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है’ की प्रस्तुति दी। उनके लोकप्रिय भजन ‘कभी राम बनकर, कभी श्याम बनकर चले आना’ पर श्रोता भक्ति भाव में झूम उठे। वहीं, ‘खिलौना माटी का’ भजन ने जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक चिंतन का संदेश दिया।
राधा-कृष्ण और मां दुर्गा के भजनों ने बांधा समां
भजन संध्या में गायिका ने राधा-कृष्ण के प्रेम से जुड़े ‘श्याम चूड़ी बेचने आया’ और ‘श्यामा आन बसो वृंदावन में’ जैसे भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद देवी आराधना के क्रम में ‘कभी दुर्गा बनकर, कभी काली बनकर’, ‘मानो तो मैं गंगा मां हूं’ और ‘अंबे तू है जगदंबे काली’ की प्रस्तुतियों से माहौल भक्तिमय हो गया
उन्होंने ‘शिव शंकर चले रे कैलाश’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम बोलके’ और ‘राम नाम की लूट है’ जैसे भजनों से भी श्रोताओं को जोड़े रखा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘काना बरसाने में आ जयो’ और ‘कैसा चक्कर चलाया श्याम’ की प्रस्तुति हुई। ‘आरती कुंज बिहारी की’ के साथ भजन संध्या का समापन हुआ।
शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में आयोजित इस भजन संध्या में धार्मिक संगीत की विभिन्न शैलियों और देवी-देवताओं की आराधना से जुड़े भजनों ने दशहरा मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष रंग दिया।
