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मूंछ हो तो धन्नालाल जैसी, साढ़े तीन फीट लंबी मूंछों ने जमाया रंग

राष्ट्रीय दशहरा मेले की मूंछ प्रतियोगिता में 13 प्रतिभागियों ने दिखाया हुनर, दीगोद के धन्नालाल गुर्जर रहे प्रथम

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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मूंछ हो तो धन्नालाल जैसी, साढ़े तीन फीट लंबी मूंछों ने जमाया रंग
मूंछ हो तो धन्नालाल जैसी, साढ़े तीन फीट लंबी मूंछों ने जमाया रंग
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कोटा, 2 नवंबर। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले के तहत सोमवार को विजयश्री रंगमंच पर आयोजित मूंछ प्रतियोगिता में पारंपरिक शान और अनूठे अंदाज का रंग देखने को मिला। हाड़ौती संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे 13 प्रतिभागियों ने अपनी लंबी, घनी और सलीके से संवारी मूंछों का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। किसी ने मूंछों पर ताव देकर अपनी शान दिखाई तो किसी ने वजन उठाकर उनकी मजबूती का प्रदर्शन किया। एक प्रतिभागी ने इंच टेप से मूंछों की लंबाई नापकर दर्शकों को चौंका दिया।

निर्णायकों ने मूंछों की लंबाई, सुंदरता, मजबूती और बनावट के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। मुकाबले में दीगोद के नरपत खेड़ी निवासी धन्नालाल गुर्जर ने प्रथम स्थान हासिल किया। चेचट के रामकरण द्वितीय और बारां के नरोत्तम तृतीय स्थान पर रहे।

प्रतियोगिता के विजेता धन्नालाल गुर्जर ने बताया कि वे वर्ष 2004 से लगातार इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं और हर बार कोई न कोई पुरस्कार जीतते आए हैं। मूंछों की देखभाल के लिए वे रोजाना उन्हें धोने के बाद शुद्ध सरसों के तेल और भैंस के दूध से मालिश करते हैं। इसी नियमित देखभाल के चलते उनकी मूंछों की चमक और मजबूती बनी हुई है। उनकी एक तरफ की मूंछ की लंबाई करीब साढ़े तीन फीट है।

धन्नालाल की मूंछों के पीछे मां का आशीर्वाद भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि दादी के निधन के समय परिवार के अन्य सदस्यों ने परंपरा के अनुसार दाढ़ी-मूंछ मुंडवा ली थी, लेकिन मां ने उन्हें मूंछें न उतरवाने की छूट दी और उन्हें सहेजकर रखने की सलाह दी। मां की इसी सीख और अपने शौक के दम पर धन्नालाल पुष्कर, नागौर, झालरापाटन, सांगोद और बूंदी सहित कई मेलों और आयोजनों में मूंछ प्रतियोगिताओं के खिताब जीत चुके हैं।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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