कोटा। विद्यार्थियों को विषय पढ़ाने के साथ उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों को संवादात्मक, गतिविधि आधारित और व्यावहारिक शिक्षण अपनाना होगा। कोटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कोटा पॉलिटेक्निक कॉलेज एवं कोटा कॉलेज ऑफ एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह बात कही। आयोजन में जेसीआई कोटा एवं लायंस क्लब कोटा टेक्नो ने सहयोग किया।
मुख्य वक्ता जेसीआई इंडिया के जोन ट्रेनर प्रखर वर्मा ने कहा कि सकारात्मक वातावरण और उचित मार्गदर्शन विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा एवं व्यक्तित्व को बेहतर दिशा दे सकते हैं। शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ानी होगी। उन्होंने व्यावहारिक अनुभवों के जरिए विषय समझाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थी अर्जित ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करना सीखते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए चेयरमैन प्रो. डॉ. आर.ए. गुप्ता ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का निरंतर सीखना और समय के अनुरूप अपनी शिक्षण पद्धतियों में बदलाव करना आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण शिक्षकों को नई तकनीकों और विचारों से परिचित कराते हैं।
डायरेक्टर सिद्धार्थ गुप्ता ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य किताबी ज्ञान के साथ विद्यार्थियों में कौशल, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए।
कार्यक्रम में फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश चंद्र नागर, पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य देवेश गोचर एवं एजुकेशन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एल. मेहरा सहित तीनों संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे। समापन पर तीनों प्राचार्यों ने मुख्य वक्ता का आभार जताया।
