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फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण के गुर बताए

विद्यार्थी-केंद्रित और व्यावहारिक शिक्षण पद्धतियां अपनाने पर जोर; शिक्षकों की भूमिका को बताया विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण

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फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण के गुर बताए
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कोटा, 18 सितंबर 2026। कोटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कोटा पॉलिटेक्निक कॉलेज और कोटा कॉलेज ऑफ एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में जे.सी.आई. कोटा एवं लायंस क्लब कोटा टेक्नो के सहयोग से फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के चेयरमैन प्रो. डॉ. आर.ए. गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का निरंतर सीखते रहना और बदलते समय के अनुरूप अपनी शिक्षण पद्धतियों को विकसित करना आवश्यक है। शिक्षक विद्यार्थियों के लिए केवल विषय ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जे.सी.आई. इंडिया के जोन ट्रेनर जे.सी. प्रखर वर्मा रहे। सत्र की शुरुआत में डायरेक्टर सिद्धार्थ गुप्ता ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया।

विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पर जोर

जे.सी. प्रखर वर्मा ने विद्यार्थी जीवन में एक अच्छे शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा, व्यक्तित्व विकास और भविष्य को बेहतर दिशा दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थी-केंद्रित, संवादात्मक और रुचिकर शिक्षण विधियों को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने शिक्षकों को नवीन और रचनात्मक तरीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया, ताकि विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनाई जा सके। कार्यक्रम में व्यावहारिक शिक्षण के महत्व पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि व्यावहारिक अनुभव से विद्यार्थियों को विषयों को बेहतर ढंग से समझने और अर्जित ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने में मदद मिलती है।

डायरेक्टर सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने व्यावहारिक, गतिविधि-आधारित और छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।

शिक्षकों के निरंतर विकास पर जोर

चेयरमैन प्रो. डॉ. आर.ए. गुप्ता ने कहा कि फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान और शिक्षण कौशल को निरंतर विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से शिक्षक नई तकनीकों और विचारों से परिचित होते हैं, जिसका लाभ विद्यार्थियों को मिलता है।

कार्यक्रम में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि कॉलेज केवल अकादमिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और समग्र व्यक्तित्व के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में कोटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. जगदीश चंद्र नागर, कोटा पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य देवेश गोचर एवं कोटा कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. बी.एल. मेहरा सहित तीनों संस्थानों के शिक्षक और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

तीनों संस्थानों के प्राचार्यों ने कार्यक्रम को शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए उपयोगी बताया और मुख्य वक्ता जे.सी. प्रखर वर्मा का आभार व्यक्त किया।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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