कोटा। शहर में वाहनों की फिटनेस जांच के नाम पर मनमानी वसूली के आरोप सामने आए हैं। भामाशाह मंडी के पास संचालित दो फिटनेस सेंटरों पर वाहनों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने की शिकायत है। आरोप है कि सेंटरों पर वाहनों के प्रकार के अनुसार निर्धारित फिटनेस शुल्क की सूची भी प्रदर्शित नहीं की गई है, जिससे वाहन मालिकों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उनसे कितना शुल्क लिया जाना चाहिए।
गुरुवार सुबह करीब साढ़े 7 बजे मिली जानकारी के अनुसार भामाशाह मंडी के पास दो फिटनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। यहां छोटे और बड़े वाहनों की फिटनेस के लिए अलग-अलग राशि वसूले जाने की बात सामने आई है। शिकायत के अनुसार, सेंटर पर निर्धारित दरों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहन मालिकों से मनमानी रकम लिए जाने के आरोप लग रहे हैं।
रेट लिस्ट नहीं होने पर उठे सवाल
वाहन फिटनेस के लिए सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क की जानकारी फिटनेस सेंटर पर प्रदर्शित किए जाने की मांग उठ रही है। आरोप है कि सेंटरों पर ऐसी कोई सूची नहीं लगी है, जिससे वाहन मालिकों को निर्धारित शुल्क की जानकारी मिल सके।
मामले की जानकारी लेने के लिए फिटनेस सेंटर के कर्मचारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन आरोप है कि कर्मचारी सवालों से बचते नजर आए।
RTO ने कहा- ‘यह मेरी जिम्मेदारी नहीं’
मामले को लेकर प्रादेशिक परिवहन अधिकारी मनीष शर्मा से बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि फिटनेस सेंटर की यह व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी के तहत नहीं आती और जिला परिवहन अधिकारी की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि फिटनेस सेंटर संचालकों को वाहनों की श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क की सूची प्रदर्शित करनी चाहिए।
RTO ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से फिटनेस शुल्क की दरें निर्धारित हैं और सेंटर पर इन दरों को लगाया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को लिखने की बात कही।
मनीष कुमार शर्मा ,प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कोटा
कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब नहीं
फिटनेस सेंटरों पर मनमानी वसूली के आरोपों के बावजूद संबंधित संचालकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई को लेकर RTO की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है तो इसकी निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है।
वाहन मालिकों का कहना है कि फिटनेस प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए सेंटरों पर निर्धारित शुल्क की रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए। फिलहाल लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
