कोटा.शिक्षा नगरी कोटा में गणेशोत्सव के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गणपति स्थापना से लेकर विसर्जन तक धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। गणेश प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना, आकर्षक झांकियों, स्वागत द्वार, भजन-संध्या, प्रसादी वितरण, अखाड़ों के करतब और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के बीच अब विसर्जन को भी शांतिपूर्ण, सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है। टीम जीवनदाता लोगों को रक्तदान व एसडीपी के साथ नेत्रदान, अंगदान व देहदान का संदेश दे रही है, लेकिन हर पर्व हमारे लिए कुछ खास होता है, लेकिन उस दौरान हमारी नैतिक जिम्मेदारी, हमारे दायित्वों को याद रखना भी आवश्यक है, प्रशासन अपना कार्य बखूबी करता है, लेकिन हम सभी कोटा शहर को अपना परिवार, अपना शहर और अपना घर समझकर कार्य करेंगे तो यह गणेशोत्सव कुछ खास हो जाएगा। टीम जीवनदाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि सबसे सशक्त माध्यम सोशल मीडिया के मध्यम से लोगों तक कोटा शहर को सुंदर, स्वस्थ्य, स्वच्छ, पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक सद्भाव का संदेश पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता, पर्यावरण संरक्षण और शहर के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने का भी अवसर है। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए जलाशयों, तालाबों और नदी को प्रदूषण से बचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिस शहर में हम रहते हैं, उसे स्वच्छ और सुरक्षित रखना केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक, गणेशोत्सव समिति, मंदिर समिति और आयोजन से जुड़े कार्यकतार्ओं का नैतिक दायित्व भी है।
-पूजन पंडालों से ही दिया जाए पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गणेशोत्सव के दौरान पांडालों में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। समितियां श्रद्धालुओं को प्रतिमा विसर्जन की निर्धारित व्यवस्था, पूजन सामग्री के उचित निस्तारण और जल स्रोतों की स्वच्छता के प्रति जागरूक कर सकती हैं। पांडालों में फूल-माला, नारियल, कपड़े, प्लास्टिक, थमोर्कोल और अन्य पूजन सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय अलग-अलग संग्रह करने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे जुलूस मार्ग और आयोजन स्थलों पर गंदगी फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
- जलाशयों को प्रदूषण से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी
विसर्जन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि नदी, तालाब अथवा अन्य जलाशयों में ऐसी सामग्री न पहुंचे, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो। प्रशासन की ओर से जहां निर्धारित विसर्जन स्थल अथवा कृत्रिम कुंड की व्यवस्था की गई हो, समितियां श्रद्धालुओं को उन्हीं स्थानों का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। विसर्जन स्थल पर पर्याप्त प्रकाश, बैरिकेडिंग, पेयजल, प्राथमिक उपचार, सुरक्षा व्यवस्था, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान तथा साफ-सफाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से विसर्जन स्थल तक पहुंचाने में प्रशासन का सहयोग कर सकते हैं।
- पूजन सामग्री के लिए अलग संग्रह केंद्र
गणेशोत्सव समितियां अपने-अपने पांडालों में पूजन सामग्री के लिए अलग पात्र या संग्रह केंद्र बना सकती हैं। फूल-माला, नारियल, पत्तियां और अन्य जैविक सामग्री को अलग एकत्रित किया जा सकता है, जबकि प्लास्टिक एवं अन्य अनुपयोगी सामग्री के लिए अलग डस्टबिन रखे जा सकते हैं। इससे पूजा समाप्त होने के बाद सामग्री सड़कों, नालियों और जल स्रोतों में जाने से बचेगी। मंदिर समितियां भी अपने स्तर पर श्रद्धालुओं को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने वाले संदेश लगा सकती हैं। 'आस्था भी रहे, स्वच्छता भी रहे', 'गणपति बप्पा मोरया, स्वच्छ रहे कोटा हमारा' जैसे संदेश लोगों में सकारात्मक जागरूकता पैदा कर सकते हैं।
- जुलूस मार्ग पर भी रहे विशेष सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा टीम हो तैनात
विसर्जन जुलूस के दौरान शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना रहती है। ऐसे में जुलूस मार्ग पर यातायात, प्रकाश, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और सफाई की व्यवस्था आवश्यक है। स्वागत द्वार और सजावट के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मार्ग पर आवागमन बाधित न हो। जुलूस मार्ग में लगाए जाने वाले स्वागत द्वार मजबूत और सुरक्षित हों। विद्युत तारों, अस्थायी ढांचों और सजावट के कारण किसी प्रकार का खतरा न हो, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। खाने-पीने के पांडाल लगाने वाली समितियां भी सड़क पर पानी या खाद्य सामग्री फैलने से रोकने तथा डिस्पोजल सामग्री के लिए पर्याप्त डस्टबिन की व्यवस्था करें।
- अखाड़ों के करतब और झांकियां बनें आकर्षण का केंद्र
गणेश विसर्जन जुलूस में अखाड़ों के करतब, धार्मिक झांकियां, बैंड, भजन मंडलियां और आकर्षक सजावट धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को जीवंत बनाते हैं। अखाड़ों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले करतब निर्धारित स्थान और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। बच्चों और दर्शकों को करतब के अत्यधिक नजदीक जाने से रोकने के लिए स्वयंसेवकों की व्यवस्था की जा सकती है। झांकियों में भगवान गणेश के धार्मिक स्वरूप के साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ, स्वच्छता, नशामुक्ति, सामाजिक सद्भाव और सेवा जैसे संदेशों को भी स्थान दिया जा सकता है। इससे उत्सव मनोरंजन के साथ सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बनेगा।
समितियां निभाएं सक्रिय भूमिका
गणेशोत्सव समितियों, मंदिर समितियों और आयोजनकतार्ओं की भूमिका इस पूरे आयोजन में महत्वपूर्ण है। प्रत्येक समिति अपने स्वयंसेवकों की टीम बनाकर पांडाल से लेकर विसर्जन स्थल तक व्यवस्थाओं में सहयोग कर सकती है। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग, विसर्जन व्यवस्था और सफाई संबंधी नियमों की जानकारी दे सकते हैं। विसर्जन के बाद जुलूस मार्ग और पांडाल स्थल की तत्काल सफाई के लिए समितियां नगर निगम के साथ समन्वय कर सकती हैं। इससे अगले दिन शहर को गंदगी से नहीं जूझना पड़ेगा और उत्सव की सकारात्मक छाप बनी रहेगी।
- प्रशासन और नागरिक मिलकर बनाएं मिसाल
गणेश विसर्जन जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, यातायात विभाग, सामाजिक संगठनों और गणेशोत्सव समितियों का समन्वय जरूरी है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात, प्रकाश, सफाई और विसर्जन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं, वहीं नागरिकों और आयोजकों का सहयोग इन व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गणेशोत्सव श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का पर्व है। यदि विसर्जन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, यातायात अनुशासन और सामाजिक सद्भाव का भी ध्यान रखा जाए तो कोटा गणेशोत्सव के माध्यम से देशभर में एक सकारात्मक संदेश दे सकता है। गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ यह संकल्प भी लिया जाए कि उत्सव की खुशियां किसी जलाशय, सड़क या सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता को प्रभावित नहीं करेंगी। यही शहर के प्रति हमारी जिम्मेदारी और सच्ची सामाजिक सहभागिता होगी।
