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‘मेरी बात सुनो’, छात्राओं ने माता-पिता से की भावनाओं को समझने की अपील

तुलना और बेवजह शक के बजाय संवाद चाहती हैं बेटियां; मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला में पढ़ाई के साथ खेलकूद व रुचियों को प्रोत्साहन देने पर जोर

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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‘मेरी बात सुनो’, छात्राओं ने माता-पिता से की भावनाओं को समझने की अपील
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नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा

‘माता-पिता हमारी बात सुनें, दूसरों से हमारी तुलना न करें और हमें समझने के बाद ही किसी बात के लिए मना करें।’ राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, तलवंडी में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने अपनी ये अपेक्षाएं खुलकर सामने रखीं। छात्राओं की बातों ने यह सवाल भी उठाया कि बच्चों की मानसिक सेहत के लिए पढ़ाई और अनुशासन के साथ उनकी भावनाओं को समझना तथा भरोसे का माहौल देना कितना जरूरी है।

21 अक्टूबर 2026, बुधवार को आयोजित कार्यशाला में मनोचिकित्सक डॉ. एम.एल. अग्रवाल और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश बंसल ने छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, सकारात्मक दृष्टिकोण और मन को स्वस्थ रखने के उपायों की जानकारी दी। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. बंसल ने प्रश्नोत्तरी के माध्यम से छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

तुलना नहीं, भरोसा और संवाद चाहती हैं छात्राएं

कार्यशाला में जब छात्राओं से पूछा गया कि वे अपने अभिभावकों से क्या अपेक्षा रखती हैं, तो उन्होंने कहा कि माता-पिता उनकी तुलना भाई-बहनों या दूसरे बच्चों से न करें। उनकी बातों को ध्यान से सुनें और किसी काम के लिए रोकने से पहले उसका कारण समझाएं। छात्राओं ने मोबाइल के उपयोग और मित्रों से मिलने जैसे विषयों पर अनावश्यक संदेह नहीं करने की अपेक्षा भी जताई।

उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद, चित्रकला और अन्य रुचियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए। छात्राओं के अनुसार, परिवार का प्रोत्साहन और उनकी पसंद को समझने का प्रयास आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।

कार्यशाला में कक्षा नौवीं की छात्रा स्वाति वैष्णव ने इस विषय पर अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की। उनकी कविता ने छात्राओं की भावनाओं और अभिभावकों से उनकी अपेक्षाओं को अभिव्यक्ति दी।

तीन बेटियों की शिक्षा को बनाया प्राथमिकता

कार्यशाला के दौरान एक अन्य छात्रा ने अपने परिवार का अनुभव साझा किया। उसने बताया कि वह तीन बहनें हैं और उनके माता-पिता सामाजिक टिप्पणियों की परवाह किए बिना तीनों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर पूरा ध्यान देते हैं। यह उदाहरण अभिभावकों के सहयोग, समान अवसर और प्रोत्साहन के महत्व को सामने लाया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य अनुपमा चौधरी ने चिकित्सकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना भी आवश्यक है। बच्चों की भावनाओं को समझना, उनकी बात सुनना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना उनके आत्मविश्वास तथा सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला का संदेश स्पष्ट रहा कि बच्चों की समस्याओं को केवल अनुशासन या पढ़ाई के नजरिये से देखने के बजाय उनकी बात सुनना और संवाद बनाए रखना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता परिवार और विद्यालय, दोनों स्तरों पर सहयोगपूर्ण वातावरण बनाने से मजबूत हो सकती है।

कार्यक्रम की जानकारी होप सोसाइटी, कोटा के मानद सचिव डॉ. अविनाश बंसल ने दी। सोसाइटी की 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन का नंबर 07442-333666 है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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