कोटा। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर शहर के बोरखेड़ा स्थित गायत्री आश्रम में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। आश्रम परिसर में इस बार गोबर से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई। विशेष बात यह रही कि भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना से पहले 11 बालिकाओं का बाल संस्कार विधि से पूजन किया गया और उन्हीं के हाथों से प्रतिमा स्थापित कराई गई।
आश्रम के प्रधान संचालक एवं संरक्षक यज्ञदत्त हाड़ा ने बताया कि गायत्री आश्रम में वर्ष 1965 से गोबर से निर्मित गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने की परंपरा चली आ रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए गोबर से बनी करीब 200 छोटी गणेश प्रतिमाएं तैयार कर वितरित की गईं, ताकि लोग इन्हें अपने-अपने घरों में स्थापित कर सकें।
इन इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की खासियत इनके विसर्जन की प्रक्रिया भी है। आश्रम प्रबंधन के अनुसार अनंत चतुर्दशी के अवसर पर इन प्रतिमाओं को नदियों या अन्य जलस्रोतों में प्रवाहित करने के बजाय घर पर ही गमले में विसर्जित किया जाएगा। इससे प्रतिमा धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाएगी और जल प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
आश्रम प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की कि गणेश उत्सव के दौरान आस्था और भक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं। पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं का उपयोग और घर पर विसर्जन के जरिए जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में योगदान दिया जा सकता है।
