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कोटा हमेशा सीखता है, संभलता है, बदलता है, पर हारता कभी नहीं...

अजेय कोटा | उद्योगों के बाद कोचिंग ने संभाला, अब पर्यटन, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे गढ़ेंगे सुनहरा भविष्य

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चुनौतियों को मात देकर फिर नई पहचान बना रहा है जीवट लोगों का शहर

समकित जैन . कोटा

कोटा हारता नहीं है। करीब 30 साल पहले जब जेके सिंथेटिक्स और बड़े उद्योगों की चिमनियां धीमी पड़ने लगी थीं, तब यह सबकी जुबां पर था कि कोटा का भविष्य खत्म हो गया है। लेकिन शहर के जीवट लोगों ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को बदला। देखते ही देखते फैक्ट्री के सायरन की जगह क्लासरूम की घंटियों ने ले ली। मशीनों की आवाज की जगह फिजिक्स और केमिस्ट्री के लेक्चर सुनाई देने लगे। देशभर से छात्र आने लगे और कोटा ने खुद को फिर से खड़ा कर लिया।

आज 2026 में कोटा एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चुनौती फैक्ट्रियों की नहीं, बल्कि भविष्य की है। कोचिंग इंडस्ट्री अब भी शहर की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में छात्र संख्या, प्रतियोगिता, ऑनलाइन शिक्षा और बदलते करियर विकल्पों ने कोटा के छोटे-बड़े व्यापारियों, उद्योगपतियों, हॉस्टल संचालकों, किसानों, युवाओं और नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि कोटा खुद को कैसे बदलेगा?

कोटा अब बदल रहा है। इस बदलते कोटा की पटकथा पर्यटन, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक हब, एग्रो प्रोसेसिंग और स्टार्टअप इकोनॉमी के इर्द-गिर्द लिखी जा रही है। कोटा स्टोन की खदानों, कोटा डोरिया के करघों और बिजली उद्योगों की ताकत आज भी कोटा के साथ है। चंबल की लहरों से लेकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की रफ्तार तक, मुकुंदरा रिजर्व के जंगलों से लेकर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की उड़ानों तक और स्टार्टअप्स के को-वर्किंग स्पेस तक... कोटा एक बार फिर अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। क्योंकि इतिहास गवाह है, कोटा सीखता है, संभलता है, बदलता है, लेकिन हारता कभी नहीं।

चंबल से मुकुंदरा तक... संभावनाओं का पूरा आकाश

चंबल रिवरफ्रंट, सिटी पार्क, सेवन वंडर्स, गरड़िया महादेव, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य ने कोटा को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दी है। टाइगर रिजर्व रणथंभौर की तर्ज पर विकसित हो तो होटल, ट्रैवल, गाइड, परिवहन और स्थानीय रोजगार के अवसर मिले। जयपुर-उदयपुर जाने वाले घरेलू व विदेशी पर्यटकों को आधुनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन मिल रहा है। मथुराधीश कॉरिडोर से धार्मिक पर्यटन को दिशा मिलेगी। री-ब्रांडिंग से फिल्म शूटिंग के नए द्वार भी खोले हैं।

देश के आर्थिक गलियारे पर खड़े होने से ट्रांजिट प्वांट बना शहर

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे ने कोटा को नई रणनीतिक ताकत दी है। देश में आर्थिक गतिविधियां अब बंदरगाहों, एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक नेटवर्क के आसपास केंद्रित हो रही हैं। कोटा इस राष्ट्रीय आर्थिक धुरी के करीब खड़ा है। इंदौर, जयपुर और दिल्ली के बीच कोटा ट्रांजिट पॉइंट है। इससे परिवहन लागत कम होगी और नए वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क तथा कंपनियों के लिए अवसर बनेंगे। बिजली, पानी और भूमि की उपलब्धता कोटा में पहले से हैं, जिससे हमें एक्सप्रेस-वे के पास औद्योगिक कॉरिडोर का फायदा सबसे ज्यादा मिलेगा।

राष्ट्रीय एयर नेटवर्क से उड़ान की तैयारी में कोटा, बदलेगी तस्वीर

शंभूपुरा में प्रस्तावित कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट कोटा से एयर कनेक्टिविटी की तस्वीर को बदल देगा। एयरपोर्ट का सीधा असर पर्यटन, शिक्षा, उद्योग, मेडिकल सेवाओं और निवेश पर पड़ेगा। अभी कोटा आने वाले लोगों को जयपुर, उदयपुर या इंदौर के रास्ते यात्रा करनी पड़ती है। अब हाड़ौती की धरती पहली बार सीधे राष्ट्रीय एयर नेटवर्क से जुड़ेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि एयरपोर्ट किसी भी शहर के लिए निवेश आकर्षित करने वाला सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। यही वजह है कि कोटा की नई अर्थव्यवस्था में एयरपोर्ट को 'गेम चेंजर' माना जा रहा है।

खेत से फैक्ट्री तक, फसलें बदलेंगी किस्मत

हमारी सबसे बड़ी ताकत कृषि भी है। प्रदेश में धनिया उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा यहां से है। लहसुन, सोयाबीन, सरसों और मसाला फसलों में हम अग्रणी है। एग्रो प्रोसेसिंग, स्पाइस पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यात आधारित उद्योग किसानों की आय बढ़ाने के साथ नए रोजगार भी पैदा कर सकते हैं। अभी किसान कच्चा माल बेचते हैं, लेकिन भविष्य में पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए कई गुना अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।

टैलेंट एक्सपोर्टर से जॉब क्रिएटर बनने की तैयारी

कोटा देश को टैलेंट एक्सपोर्ट करता है। चुनौती यह है कि कोटा जिस प्रतिभा को तैयार करता है, उसका एक हिस्सा शहर की अर्थव्यवस्था का निर्माता भी बने। सार सुविधाओं के बाद युवा नौकरी नहीं, खुद का उद्यम शुरू कर रहे हैं। यहां ग्रीन एनर्जी, सोलर, एआई-संचालित लॉजिस्टिक्स, स्टोन वेस्ट रीसाइक्लिंग और ई-कॉमर्स जैसे स्टार्टअप्स को उभरने के मौके हैं। बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद में बड़ी आईटी इंडस्ट्री है तो कोटा के पास युवा टैलेंट पूल की पूंजी है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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