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कोटा में हॉस्टल के बिजली बिलों में फिक्स्ड चार्ज बढ़ने का विरोध, 16 हजार से अधिक शुल्क पर जताई नाराजगी

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कोटा में हॉस्टल के बिजली बिलों में फिक्स्ड चार्ज बढ़ने का विरोध, 16 हजार से अधिक शुल्क पर जताई नाराजगी
कोटा में हॉस्टल के बिजली बिलों में फिक्स्ड चार्ज बढ़ने का विरोध, 16 हजार से अधिक शुल्क पर जताई नाराजगी
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कोटा। कोटा में हॉस्टल संचालकों और व्यापारियों ने बिजली बिलों में लगाए जा रहे स्थायी शुल्क (फिक्स्ड चार्ज) में बढ़ोतरी का विरोध किया है। चंबल हॉस्टल एसोसिएशन एवं कोटा व्यापार महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता (एसई) से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थानों के विद्युत कनेक्शनों पर पहले करीब 800 रुपए स्थायी शुल्क लगता था, जिसे बढ़ाकर 16 हजार रुपए से अधिक कर दिया गया है। इससे हॉस्टल संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

2 से 3 दिन में निर्णय का आश्वासन

प्रतिनिधिमंडल ने अधीक्षण अभियंता के सामने हॉस्टल संचालकों की समस्याएं रखीं। इस मुद्दे पर केईडीएल की टीम के साथ भी चर्चा की गई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्थायी शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर उचित समाधान निकालने की मांग की।

एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा के अनुसार, इस संबंध में ऊर्जा मंत्री से भी बातचीत की गई है। अधीक्षण अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि आगामी दो से तीन दिनों में फिक्स्ड चार्ज के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

विद्यार्थियों की संख्या में कमी से बढ़ी परेशानी

विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि कोटा में हॉस्टलों और शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या में कमी आने से कई संचालकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसे में बिजली के बिलों का भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ संस्थानों के न्यूनतम बिजली बिल करीब 10 हजार रुपए प्रतिमाह तक आ रहे हैं।

इसके अतिरिक्त 16 हजार रुपए से अधिक का स्थायी शुल्क लगने से खर्च और बढ़ गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि बिजली की वास्तविक खपत कम होने के बावजूद अधिक स्थायी शुल्क देना हॉस्टल संचालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

शुल्क पूर्ववत करने और विद्युत भार घटाने की मांग

कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने मांग की कि स्थायी शुल्क में की गई अप्रत्याशित बढ़ोतरी वापस लेकर इसे पूर्ववत किया जाए या उचित एवं व्यावहारिक दर पर निर्धारित किया जाए।

उन्होंने यह भी मांग रखी कि जिन हॉस्टल संचालकों और संस्थानों को कम बिजली भार की आवश्यकता है, उन्हें स्वीकृत विद्युत भार कम करवाने की सुविधा नि:शुल्क दी जाए। इसके अलावा, स्थायी शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर अंतिम निर्णय होने तक प्रभावित संस्थानों को राहत देने पर भी विचार किया जाए।

बैठक में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, सचिव सतप्रीत सिंह, राजेश कटारिया, दिग्विजय शुक्ला, कैलाश अग्रवाल, राधेश्याम प्रजापत, मोहित सेठी, कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी और चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के पूर्व सचिव अशोक लड्ढा सहित कई हॉस्टल संचालक एवं व्यापारी मौजूद रहे।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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