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कोटा के हॉस्टल-मेस में बच्चों की थाली से खिलवाड़, बटर की जगह तेल और दूध के पनीर की जगह सोयाबीन उत्पाद!

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 37 नमूने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक, बाकी मानकों से कम गुणवत्ता के मिले

संवाददाता
विशेष संवाददाता विशेष रिपोर्टर
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कोटा के हॉस्टल-मेस में बच्चों की थाली से खिलवाड़, बटर की जगह तेल और दूध के पनीर की जगह सोयाबीन उत्पाद!
कोटा के हॉस्टल-मेस में बच्चों की थाली से खिलवाड़, बटर की जगह तेल और दूध के पनीर की जगह सोयाबीन उत्पाद!
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कोटा। कोचिंग सिटी कोटा में पढ़ाई के लिए घर छोड़कर आए हजारों विद्यार्थियों की सेहत पर हॉस्टल और मैस संचालकों की लापरवाही भारी पड़ सकती है। विद्यार्थियों को खाने में टेबल बटर के नाम पर मिलावटी उत्पाद परोसे जा रहे हैं तो पनीर के नाम पर सोयाबीन से बने उत्पाद इस्तेमाल किए जा रहे हैं। दही में फैट की मात्रा निर्धारित मानकों से कम मिली है। गोलगप्पों के साथ परोसे जाने वाले काले नमक और काली मिर्च के नमूने भी जांच में फेल हुए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आई ये तस्वीर हॉस्टलों और मैस में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

दरअसल, विभाग ने पिछले महीने शहर के अलग-अलग हॉस्टलों और मैस से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच करवाई थी। इनमें 15 नमूने फेल पाए गए। अक्टूबर तक की समग्र कार्रवाई के आंकड़े इससे भी ज्यादा चिंताजनक हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने कोटा में कुल 601 नमूने लिए। इनमें से 523 की जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार 148 नमूने फेल पाए गए। यानी जांचे गए कुल नमूनों में करीब 28.30 प्रतिशत खाद्य पदार्थ गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

सबसे गंभीर बात यह है कि फेल हुए 148 नमूनों में से 37 अनसेफ श्रेणी में पाए गए, जिन्हें स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक माना गया है। शेष 111 नमूने सब स्टैंडर्ड श्रेणी के हैं, यानी उनमें उत्पाद के दावे के अनुरूप गुणवत्ता और निर्धारित सामग्री नहीं मिली। विभाग अब इन मामलों में सक्षम न्यायालय में चालान पेश करने की तैयारी कर रहा है।

हॉस्टलों में बटर-पनीर से लेकर नमक तक फेल

जांच में वसंती रेजीडेंसी, रोड नंबर-1, इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र के टेबल बटर और पनीर के नमूने अनसेफ मिले। बीएल रेजीडेंसी, राजीव गांधी नगर में दही के दो नमूने सब स्टैंडर्ड पाए गए। नवदुर्गा रेजीडेंसी, लैंडमार्क सिटी कुन्हाड़ी में टेबल बटर अनसेफ और पनीर सब स्टैंडर्ड मिला। द ओलिव (एसआर रॉयल होम), लैंडमार्क सिटी में दही का नमूना फेल हुआ।

सिग्नेचर टावर प्रीमियम बॉयज हॉस्टल, इंद्र विहार में दही सब स्टैंडर्ड और श्री श्याम गोल्ड ब्रांड के एक किलो पैक काले नमक का नमूना अनसेफ मिला। दयानिधि रेजीडेंसी, राजीव गांधी नगर स्पेशल में टेबल बटर अनसेफ और पनीर सब स्टैंडर्ड पाया गया। विज्ञान नगर के पंजाबी फूड प्रतिष्ठान में टेबल बटर और काली मिर्च के नमूने अनसेफ मिले।

दूध-दही ही नहीं, तेल, मसाले और सॉफ्ट ड्रिंक भी जांच के घेरे में

विभाग की जांच में डेयरी उत्पादों से लेकर किराना, तेल, मसाले और तैयार खाद्य पदार्थों तक में गड़बड़ियां सामने आई हैं। पनीर, बटर, देसी घी, दूध, दही, मावा, मलाई बर्फी, पनीर जलेबी, मिल्क केक, गुलाब जामुन और अन्य मिठाइयों के नमूने फेल हुए हैं। तेल और वनस्पति घी, काली मिर्च, धनिया, लाल मिर्च, काला नमक और सेंधा नमक भी जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे।

इसके अलावा बटर पनीर मसाला ग्रेवी, दाल तड़का, पताशी-गोलगप्पे का पानी, पैकेज्ड वाटर, रॉयल लेमन और कोला सॉफ्ट ड्रिंक, नमकीन मटर, चिप्स, पास्ता और कड़के नमकीन जैसे उत्पादों में भी मिलावट या गुणवत्ता संबंधी खामियां मिली हैं।

सस्ते उत्पादों से बढ़ाया जा रहा मुनाफा

खाद्य पदार्थों में मिलावट के तरीकों ने भी चिंता बढ़ाई है। जांच से जुड़े मामलों में तेल और वनस्पति घी में सस्ते पाम ऑयल की मिलावट, नमकीन को बार-बार इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल में तलने तथा मसालों और नमक में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं। काली मिर्च को चमकाने के लिए बाहरी रंग या तेल का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। गोलगप्पों के पानी में सिंथेटिक रंग और टार्टरिक एसिड मिलाने की शिकायतें हैं।

हॉस्टल और मैस संचालक विद्यार्थियों से रहने और भोजन के पूरे पैसे वसूलते हैं, लेकिन खाने की गुणवत्ता में कटौती कर रहे हैं। सवाल सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जिसके आधार पर अभिभावक अपने बच्चों को कोटा में पढ़ाई के लिए भेजते हैं। अब जरूरत सिर्फ नमूने लेने की नहीं, बल्कि दोषी संचालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और हॉस्टलों-मेस में नियमित निगरानी की है।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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