कोटा | नागरिक अभिव्यक्ति। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, रामपुरा में आयोजित नियमित प्रवचन में नंदीषेण मुनि जी म.सा. ने मन, वचन और काया पर संयम रखने का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के विचार, व्यवहार और शब्द उसके व्यक्तित्व के साथ-साथ उसके कर्मों को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों, वाणी और आचरण के प्रति सजग रहना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि वाणी से कर्मों का बंधन भी होता है और मधुर वाणी व अच्छे व्यवहार से संबंधों में सुधार भी आता है। बोलते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि कटु वचन, गलत कथन और अनुचित व्यवहार व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। मनुष्य को अपने कर्मों के अनुरूप फल भोगना पड़ता है, इसलिए पापकर्मों से बचने और विचारों को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब व्यक्ति प्रवचनों में सुनी गई शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाता है। अच्छे विचार, संयमित वाणी, अहिंसक व्यवहार और सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव अपनाकर जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।
जैन धर्म में अहिंसा और जमीकंद त्याग का महत्व
जितेन्द्र मुनि जी म.सा. ने जैन धर्म में अहिंसा, जीवदया और आत्मकल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव के प्रति दया और करुणा रखना धर्म का मूल आधार है। व्यक्ति को ऐसा आचरण अपनाना चाहिए, जिससे किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचे।
मुनिश्री ने जैन दर्शन में जीवों की अनंतता की अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि जैन मान्यताओं के अनुसार पानी की एक बूंद और जमीकंद में भी असंख्यात जीव माने गए हैं। इसी कारण जैन धर्म में अहिंसा के पालन की दृष्टि से जमीकंद का त्याग महत्वपूर्ण माना गया है।
उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से खानपान और दैनिक व्यवहार में अहिंसा का ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में दया, करुणा, संयम और आत्मशुद्धि को अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।
जीवों की रक्षा ही अहिंसक जीवन की दिशा
संघ अध्यक्ष पंकज मेहता ने कहा कि जीवों की रक्षा और उनके प्रति दया का व्यवहार अहिंसक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संघ मंत्री अनिल दक ने कहा कि प्रवचनों के माध्यम से श्रावक अपने जीवन को बेहतर बनाने और धार्मिक शिक्षाओं को आचरण में उतारने का प्रयास कर रहे हैं।
रामपुरा स्थित श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ में नियमित प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालु धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार की शिक्षाओं का लाभ ले रहे हैं।
