नागरिक अभिव्यक्ति । कोटा
कोटा। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, रामपुरा में चल रहे नियमित प्रवचन में शनिवार को जैन संत योगेश मुनि जी म.सा. और जितेन्द्र मुनि जी म.सा. ने सत्य, आत्मसंयम, संतोष और सेवा का महत्व बताया। योगेश मुनि ने कहा कि व्यक्ति को अपनी प्रकृति, विचारों और व्यवहार में बदलाव लाना चाहिए। केवल वस्त्र बदलने से जीवन नहीं बदलता, इसलिए बाना नहीं, बान बदलने की जरूरत है। क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह छोड़कर क्षमा, विनम्रता तथा सदाचार अपनाना ही आत्मिक उन्नति का मार्ग है।
मुनिश्री ने श्रावक के तेरहवें गुण सतकथी की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति को वीतराग वाणी सुनने के साथ सत्य बोलना और विवेकपूर्ण आचरण करना चाहिए। अधूरा सत्य असत्य से भी अधिक नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि आधी-अधूरी जानकारी भ्रम पैदा करती है।
जितेन्द्र मुनि ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार चलने वाला भोगी है, जबकि जरूरत से ज्यादा संग्रह करने वाला रोगी है। संतोष और भक्ति मन को शुद्ध कर सदाचार की ओर ले जाते हैं। उन्होंने मनोबल मजबूत रखने और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, सेवा केवल शब्दों से नहीं, कर्मों से प्रकट होती है।
संघ अध्यक्ष पंकज मेहता ने कहा कि प्रवचनों से सत्य, सद्बुद्धि, करुणा और आत्मसंयम अपनाने की प्रेरणा मिलती है। मंत्री अनिल दक ने नियमित प्रवचनों को सभी के कल्याणकारी बताया।
