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कर्मयोगी सेवा संस्थान का 27वां 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण आयोजन शुरू

द्वितीया पर शहीद पुलिसकर्मियों और न्यायप्रिय विधिवेत्ताओं की दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए किया तर्पण

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कर्मयोगी सेवा संस्थान का 27वां 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण आयोजन शुरू
कर्मयोगी सेवा संस्थान का 27वां 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण आयोजन शुरू
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कोटा, 29 सितंबर। कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से पितृ पक्ष में 27वें 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण एवं श्रद्धांजलि आयोजन की शुरुआत की गई। रोटेदा रोड स्थित गुरुधाम कॉलोनी, सोगरिया स्टेशन के पास आयोजित इस अनुष्ठान में देश-दुनिया की मानव कल्याणकारी दिवंगत आत्माओं और कोटा सहित देश के विकास में योगदान देने वाले महापुरुषों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है।

वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ क्रियाकांडी पंडित पवन शर्मा के आचार्यत्व में द्वितीया का श्राद्ध तर्पण कर्म संपन्न हुआ। इस दौरान संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी, जिला अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, नीलम शर्मा, धर्मपाल सिंह, नीलम सिंह, हेमंत सिंह, लक्ष्मण सिंह हाड़ा, नरेंद्र सिंह जादौन और हरिराम मीणा ने तर्पण एवं पूजा-अर्चना की। अनुष्ठान के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को खीर, पूरी और सब्जी का भोजन कराया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया कि 16 दिवसीय अनुष्ठान की विशेषता यह है कि इसमें केवल व्यक्तिगत परिजनों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज, प्रकृति, संपूर्ण सृष्टि और देशसेवा से जुड़ी दिवंगत आत्माओं के लिए भी तिथिवार श्राद्ध समर्पित किए जा रहे हैं।

तिथिवार अलग-अलग वर्गों को समर्पित तर्पण

आयोजन के तहत 27 सितंबर को प्रतिपदा पर जलचर, थलचर, नभचर और पशु-पक्षियों को तर्पण समर्पित किया गया। 28 सितंबर को द्वितीया पर शहीद पुलिसकर्मियों और न्यायप्रिय विधिवेत्ताओं के लिए तर्पण किया गया। आगामी कार्यक्रम में 29 सितंबर को तृतीया पर अन्नदाता किसानों, 30 सितंबर को चतुर्थी-पंचमी पर सीमा पर शहीद सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों, 1 अक्टूबर को छठी पर वैज्ञानिकों तथा 2 अक्टूबर को सप्तमी पर भ्रूण हत्या की शिकार अजन्मी कन्याओं के लिए तर्पण किया जाएगा।

इसी क्रम में 3 अक्टूबर को अष्टमी पर आतंकवाद और षड्यंत्र के शिकार दिवंगतों, 4 अक्टूबर को नवमी पर प्रेरणाप्रद महिलाओं, 5 अक्टूबर को दशमी पर खिलाड़ियों, कलाकारों, पत्रकारों, साहित्यकारों और राजघरानों के शासकों तथा 6 अक्टूबर को एकादशी पर दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु के शिकार लोगों के लिए तर्पण होगा।

7 अक्टूबर को द्वादशी पर साधु-संतों, 8 अक्टूबर को त्रयोदशी पर किन्नर समाज और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी पर प्राकृतिक आपदाओं तथा कोरोना महामारी में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मशांति के लिए तर्पण अर्पित किया जाएगा।

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लेखक

विशेष संवाददाता

नागरिक अभिव्यक्ति विशेष डिजिटल रिपोर्टर एवं विश्लेषक।

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