कोटा। राजस्थान माध्यमिक प्रायोगिक शिक्षा संघ का जिला शैक्षिक अधिवेशन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी में ‘सुरक्षित प्रयोगशाला, सशक्त विज्ञान, उज्ज्वल भारत’ थीम के साथ आयोजित हुआ। अधिवेशन में प्रयोगशाला सहायकों की विभिन्न समस्याओं, पदोन्नति और लंबित मांगों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संगठन ने मांगों के समाधान के लिए आगामी समय में आंदोलन चलाने का संकल्प भी लिया।
अधिवेशन में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला सहायकों के लिए वर्तमान में केवल एक पदोन्नति अवसर उपलब्ध है। संगठन के अनुसार वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक के केवल 442 पद स्वीकृत होने के कारण पदोन्नति के अवसर सीमित हैं। इससे बड़ी संख्या में कार्मिकों को लंबे समय तक एक ही पद पर कार्य करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि कई कार्मिक जिस पद पर नियुक्त होते हैं, उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
पदोन्नति और सेवा संबंधी मांगें उठीं
अधिवेशन में प्रयोगशाला अधीक्षक के पद को स्वीकृत कर उसे प्रभावी बनाने की मांग उठाई गई। इसके अलावा प्रयोगशाला सहायकों को वरिष्ठ अध्यापक पद पर जाने के लिए नियमों के अनुरूप विकल्प पत्र की सुविधा देने तथा बी.एड. धारक प्रयोगशाला सहायकों को MACP का लाभ दिए जाने सहित अन्य मांगों पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि प्रयोगशाला सहायकों की भूमिका विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा और प्रयोगात्मक कार्य को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनकी सेवा संबंधी समस्याओं और पदोन्नति के अवसरों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।
नई जिला कार्यकारिणी का गठन
अधिवेशन के दौरान संगठनात्मक स्तर पर भी निर्णय लिया गया। सर्वसम्मति से आशीष शर्मा को जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया और नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया।
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने संगठन को मजबूत करने, प्रयोगशाला सहायकों को एकजुट करने और उनकी लंबित मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार के समक्ष रखने का संकल्प व्यक्त किया। अधिवेशन के समापन पर संगठन की आगामी रणनीति और आंदोलनात्मक कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई।
अधिवेशन में प्रयोगशाला सहायकों से जुड़े सेवा, पदोन्नति और कार्यक्षेत्र संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए मांगों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने पर जोर दिया गया।
