कोटा @ कानून की शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए नियमों की जानकारी के साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है। नियमों और व्यावहारिकता का संतुलन ही सफल जीवन का आधार बनता है। यह विचार डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय (ALU), जयपुर की कुलगुरु प्रो. (डॉ.) निष्ठा जसवाल ने 17 अक्टूबर को बोराबास स्थित एक्सीलेंट विधि महाविद्यालय में आयोजित ‘कुलगुरु छात्र संवाद एवं अभिनंदन कार्यक्रम’ में व्यक्त किए।
महाविद्यालय निदेशक हनुमान सिंह तंवर ने बताया कि कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. निष्ठा जसवाल और सोनीपत स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल एडवाइजर प्रो. (डॉ.) परमजीत सिंह जसवाल ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों ने विधि शिक्षा को व्यावहारिक बनाने में विश्वविद्यालय की भूमिका, कृत्रिम बुद्धि मत्ता (एआई) के उपयोग और विधिक अध्ययन से जुड़े सवाल पूछे। अतिथियों ने सहजता से प्रश्नों के उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन किया। डॉ. अरुण शर्मा ने भी उच्च शिक्षा, अकादमिक विकास और विधि क्षेत्र की संभावनाओं पर विचार रखे। प्राचार्य डॉ. प्रियंका सैनी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में विधिक जागरूकता, तार्किक चिंतन और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करते हैं। कार्यक्रम में राजकीय विधि महाविद्यालय, कोटा के प्राचार्य चंद्रजीत सिंह, ओम कोठारी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के डॉ. अमित राठौर, कोटा बार एसोसिएशन अध्यक्ष भारत सिंह अड़सेला, महासचिव शंभू सोनी, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश शर्मा, एडीआर से रवि विजय, योगेश मीना और इकबाल खान उपस्थित रहे।
