कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं की गुणवत्ता की जांच तेज कर दी गई है। औषधि विभाग और प्रशासन की टीम ने मेडिकल कॉलेज के स्टोर और संबंधित वार्डों में पहुंचकर जांच-पड़ताल की। चिकित्सकों की ओर से संदिग्ध बताई गई दवाओं और इंजेक्शनों के सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनमें मेरोपेनम इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच भी शामिल हैं। विभाग के अनुसार, कुल आठ दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी दवा को प्रसूताओं की मौत का प्रमाणित कारण नहीं माना गया है।
मेरोपेनम के 7,847 इंजेक्शन खरीदे, 7,675 मरीजों को लगाए
ड्रग इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि प्रसूताओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेरोपेनम इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर संदेह जताया गया था। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है। रविवार को इसके सैंपल लिए गए थे। जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज के स्टोर में एक ही निर्माता कंपनी के इस इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच उपलब्ध मिले। दोनों बैच के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मेरोपेनम के पहले बैच के कुल 4,291 इंजेक्शन खरीदे गए थे। इनमें से 96 इंजेक्शन स्टोर में उपलब्ध मिले। वहीं, दूसरे बैच के 3,556 इंजेक्शन खरीदे गए थे, जिनमें से 76 इंजेक्शन स्टोर में बचे हुए थे।
इस तरह दोनों बैच के कुल 7,847 इंजेक्शनों में से 172 इंजेक्शन स्टोर में उपलब्ध मिले, जबकि 7,675 इंजेक्शन मरीजों को लगाए जा चुके हैं। अब प्रयोगशाला जांच से इन दोनों बैच की गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट होगी।
डॉक्टरों की राय के आधार पर लिए सैंपल
औषधि नियंत्रक अधिकारी प्रहलाद ने बताया कि मेडिकल सुपरिटेंडेंट और गायनेकोलॉजी विभाग के डॉक्टरों से परामर्श किया गया था। चिकित्सकों ने जिन दवाओं और इंजेक्शनों पर संदेह जताया, उनकी सूची के साथ अपनी राय भी विभाग को सौंपी थी। इसी आधार पर संदिग्ध दवाओं के नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
अधिकारियों के अनुसार, संदेह के दायरे में शामिल ज्यादातर दवाएं मरीजों को पहले ही दी जा चुकी हैं। ऐसे में विभाग उनकी गुणवत्ता की जांच के साथ उपचार में इस्तेमाल किए गए बैचों की भी पड़ताल कर रहा है।
एंटीबायोटिक से ऑक्सीटोसिन तक के सैंपल
मेरोपेनम के अलावा सोमवार को अन्य महत्वपूर्ण दवाओं और इंजेक्शनों के सैंपल भी लिए गए। इनमें सेफ्ट्रियाक्सोन 500 मिलीग्राम और 1 ग्राम, ट्रेनेक्सामिक इंजेक्शन, सोडियम बाइकार्बोनेट, सेफोपेराजोन-सलबैक्टम इंजेक्शन, लेवेटिरासेटम इंजेक्शन, पैंटोप्राजोल इंजेक्शन और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन शामिल हैं।
इन दवाओं का इस्तेमाल संक्रमण, रक्तस्राव नियंत्रित करने, एसिडिटी और पेप्टिक अल्सर सहित अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया जाता है। ऑक्सीटोसिन का उपयोग प्रसव संबंधी चिकित्सा में भी किया जाता है।
लैब रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
औषधि विभाग की ओर से एकत्रित सैंपल प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मेरोपेनम इंजेक्शन सहित अन्य दवाओं की गुणवत्ता जांच के दायरे में है। दवाओं की गुणवत्ता में कमी या उनका प्रसूताओं की मौत से संबंध होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही सामने आएगा।
