कोटा। सरकारी अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक अन्य महिला की तबीयत बिगड़ने के मामले में ड्रग विभाग ने कार्रवाई करते हुए छह दवाओं के संबंधित बैच के इस्तेमाल और सप्लाई पर रोक लगा दी है। विभाग ने अस्पताल पहुंचकर संदिग्ध दवाओं के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। फिलहाल दवाओं को प्रसूताओं की मौत का कारण मानने की पुष्टि नहीं हुई है।
असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर प्रहलाद मीणा के अनुसार, जांच के दायरे में मेरोपेनम इंजेक्शन के दो बैच, एनएस फ्लूइड, हाइड्रोकोर्टिसोन, डोपामाइन और पैरासिटामोल इन्फ्यूजन शामिल हैं। इनके संबंधित बैच के इस्तेमाल और सप्लाई पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल भी लिया जाएगा, ताकि उसकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।
इंजेक्शन के बाद कंपकंपी छूटने की शिकायत
मामले में सामने आया है कि इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद महिलाओं को तेज कंपकंपी छूटने लगी थी। इसके बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामलों ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था तथा इस्तेमाल की जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ड्रग विभाग अब संबंधित दवाओं के नमूनों की जांच के जरिए संभावित कारणों का पता लगाने में जुटा है।
रोशन की तबीयत बिगड़ी, अत्यधिक ब्लीडिंग हुई
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रसूता रोशन की सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ गई थी और उसे अत्यधिक ब्लीडिंग हुई। वहीं, इससे पहले भी एक आईवी फ्लूइड की गुणवत्ता पर संदेह जताया गया था। हालांकि, जांच में वह निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया था।
जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
ड्रग विभाग की ओर से लिए गए सैंपलों की लैब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित दवाओं की गुणवत्ता और घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दवाओं के संबंधित बैच पर एहतियातन रोक लगाई गई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने चिकित्सा जगत में चिंता बढ़ा दी है।
